मिर्जापुर। जिले के मौसम का मिजाज बुधवार को सुबह बदल गया। हल्की बूंदाबांदी से तापमान में गिरावट आई। नौ साल के बाद माघ महीने में बारिश हुई है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक ये बूंदाबांदी रबी की फसलों के लिए लाभकारी है। इसके पहले नौ साल पहले 27 व 28 जनवरी 2017 की रात हल्की बारिश हुई थी। इस साल बुधवार को बूंदाबांदी से 24 घंटे में तीन डिग्री न्यूनतम तापमान लुढ़क गया। इससे ठंड और गलन बढ़ गई।
बुधवार को अधिकतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। एक दिन पहले मंगलवार को अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया था। पिछले तीन दिनों से बादल मंडरा रहे थे। बुधवार की सुबह छाए बादलों के बीच अधिकतर क्षेत्रों में हुई बूंदाबांदी से किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे। हालांकि कुछ देर बाद बूंदाबादी तो थम गई लेकिन दिनभर बादल छाए रहे। उधर, बूंदाबांदी से सड़कों पर फिसलन बढ़ गई था। तापमान में गिरावट आने से ठंड के साथ ही गलन में इजाफा हो गया। ग्रामीण कृषि मौसम सेवा भू-भौतिकी विभाग बीएचयू वाराणसी के मौसम वैज्ञानिक शिव मंगल सिंह ने बताया कि आने वाले दिनों में बादल छाए रहेंगे। कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी हो सकती है लेकिन तेज बारिश की कोई संभावना नहीं है। मौसम को देखते हुए किसान फसलों की सिंचाई करें।
ओले पड़ने के आशंका से भय-मिर्जापुर। माघ महीने में घिरे बादलों और बूंदाबांदी के बीच किसानों की चिंता बढ़ गई है। मौसम वैज्ञानिक और कृषि अधिकारी इस मौसम में बारिश भले ही मुफीद बता रहे लेकिन किसानों के माथे पर बल पड़ रहा है। हलिया, सोनगढ़ा निवासी माधोलाल, राजपुर गांव निवासी भगवती प्रसाद दुबे आदि का कहना है कि बूंदाबांदी तो ठीक है यदि ओला पड़ा तो फसलों को नुकसान होगा। जिला कृषि अधिकारी डाॅ. अवधेश कुमार यादव ने बताया ये बारिश रबी फसलों के लिए काफी फायदेमंद है।
महाकवि घाघ ने कहा है कि अगहन बरसे हून, पूस बरसे दून, माघ बरसे सवाई तो फागुन में सब कुछ गंवाई, पिछले चार साल पहले जनवरी माह में भारी बारिश के चलते किसानों को रबी की फ़सल बर्बाद हुई थी। कुदरत ने ऐसा कहर बरपाया था कि किसानों को सब कुछ गंवाना पड़ा था।
-गजाशंकर चौबे, किसान, सरसा
माघ मास की बारिश फसलों के लिए वरदान साबित होती है लेकिन भारी बारिश होगी तो किसानों का नुकसान उठाना पड़ता है। इन दिनों रबी की फसल मसूर, मटर, चना और गेहूं जौ में फल-फूल आने शुरू हो गए हैं। इनको नुकसान पहुंचेगा। बारिश तो ठीक यदि ओला पड़े तो किसान बर्बाद हो जाएंगे।-केशव सिंह, किसान, ओड़ी।