क्षेत्र के डिभोर स्थित परमहंस आश्रम में मंगलवार को आयोजित सत्संग के दौरान परमहंस स्वामी अड़गड़ानंद महाराज ने भक्ति-ज्ञान की गंगा बहाई। इस अवसर पर विशाल भंडारे का भी आयोजन किया गया।
सत्संग के दौरान स्वामी जी ने जहां गृहस्थ आश्रम चलाने के सफल तरीके बताए, वहीं मानव जीवन के मूल उद्देश्य की भी व्याख्या की। स्वामी जी ने कहा कि वही व्यक्ति धर्मज्ञ, गुणी, ज्ञानी और दानी है, जिसके मन में एक ईश्वर के चरणों में अनुराग है। ईश्वर के चरणों में मन लग जाए तो मनुष्य भवबंधन से मुक्त हो जाता है।
सत्संग के दौरान स्वामी अड़गड़ानंद जी महाराज ने कहा कि प्रभु के भजन के बिना अपना कल्याण चाहने वाला मनुष्य बिना पूंछ के बैल के समान है। महाराज जी ने कहा कि मन को एकाग्र किए बगैर ईश्वर की भक्ति नहीं प्राप्त हो सकती है, अनन्य भक्ति ईश्वर की प्राप्ति का माध्यम है।
स्वामी जी ने ओम मंत्र को अक्षय मंत्र बताते हुए कहा कि दो अक्षर का ओम मंत्र में ही ईश्वर की संपूर्ण आराधना सन्निहित है। स्वामी जी ने कहा कि समर्पण और श्रद्धा से ही ज्ञान की प्राप्ति होती है।
महाराज जी ने गांव गांव, नगर-नगर गीता का अखंड पाठ करने और कराने का लोगों को संदेश देते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से आने वाली पीढ़ियों को भी ईश्वर की भक्ति और धर्म-कर्म के प्रति प्रेरणा मिलेगी।
स्वामी जी ने कहा कि मनुष्य को अपने चंचल मन के वेग को रोक कर ईश्वर के भजन में लगाना चाहिए। भजन और ध्यान की प्रेरणा किसी तत्वदर्शी महापुरुष के सानिध्य में ही प्राप्त हो सकती है। महाराज जी ने कहा कि मानव जीवन को सफल बनाने के लिए संकल्पित होकर ईश्वर का चिंतन करना चाहिए।
इस दौरान तुलसी महाराज, तानसेन बाबा, लाले बाबा, गोविंद बाबा, व्यास बाबा, रमाकांत त्रिपाठी, बाबा पशांडेय, विनोद सिंह, शिवदानी, अशोक, मुन्ना भईया, अविनाश, अनिल पांडेय, राजू दूबे, श्रीराम सिंह, थानाध्यक्ष दीप कुमार व रविंद्र सिंह यादव आदि मौजूद रहे।