जिले में सड़क हादसों में मौत सिलसिला लगातार जारी है। हर वर्ष यातायात माह मनाया जाता है। कई बार सड़क सुरुक्षा सप्ताह मनाया कर जागरुक करने का कार्य किया जाता है, पर हादसो में कमी नहीं आ पा रही है। जिले के खतरनाक मोड़, पहाड़ी और चौराहे-तिराहे ब्लैक स्पाट के रुप में चिन्हित किए गए है, पर हादसो को रोकने में प्रयास नाकाफी साबित हो रहा है।
जिले में सड़क हादसों पर गौर करें तो प्रतिदिन एक हादसा हो रहा है। हादसों में हर दूसरे दिन एक इंसान की जान जा रही है। अभी यातायात विभाग का डाटा अक्तूबर का ही है। ठंड में हादसे अभी अधिक होते है। जनवरी से अब तक 333 हादसे हो चुके है। इसमें 182 लोग घायल है और 214 की मौत हो चुकी है। नंवबर माह में भी हादसो में कई लोगों की जान जा चुकी है। ऐसे में 220 के ऊपर पहुंच चुका है। पिछले वर्ष की तुलना करें तो 2020 में कुुछ कमी आई थी। जिले में अधिकांश हादसों में बाइक सवार की जान जाती है। इसमें भी हेलमेट न लगाने के कारण हादसे होते है। अगर हेलमेट लगाए रहें तो हादसो में जान न जाए। अहरौरा की पहाड़ियां, वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग, चील्ह क्षेत्र में पुरजागिर के पास का क्षेत्र और ड्रमंडगंज की घाटी पर सबसे अधिक हादसे होते है। इन स्थानों को ब्लैक स्पाट के रुप में चिन्हित किया गया है, पर हादसो में कोई कमी नहीं आ रही है।