मिर्जापुर। जिला अस्पताल में इलाज के अभाव में शुक्रवार को दो बच्चों की मौत हो गई। बच्चों की मौत की खबर सुनते ही परिजन दहाड़ मारकर रोने लगे। आए दिन इलाज के अभाव में हो रहे बच्चाें की मौत का सिलसिला आखिर कब थमेगा यह स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारी भी नहीं बता पा रहे हैं। बड़े-बड़े वादे करने वाली सपा के शासन में ही मासूम बच्चे आए दिन जिला अस्पताल में इलाज के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। जिला अस्पताल में पिछले दो माह से बाल रोग विशेषज्ञ चिकित्सक की तैनाती नहीं हो पाई है। अस्पताल में बच्चों का एक भी डाक्टर नहीं है।
पड़री थाना क्षेत्र के झिंगुरा गांव निवासी राजेश की छह वर्षीय पुत्री सिमरन कौशल पिछले एक हप्ते से बीमार थी। उसे बुखार आ रहा था इसी बीच वह पीलिया की चपेट में आ गई। जिससे उसकी हालत काफी नाजुक हो गई और परिजन उसे शुक्रवार को जिला अस्पताल भर्ती करने के लिए ले आए। जहां चिकित्सकाें ने भर्ती करने से इंकार कर दिया। काफी मिन्नत करने के बाद बालिका को आक्सीजन लगाया गया लेकिन कुछ ही देर बाद उसने दम तोड़ दिया। चिकित्सक ने बताया कि पीलिया के कारण उसका खून खत्म हो गया था और वह काफी कमजोर हो गई थी।
उधर, देहात कोेतवाली क्षेत्र के बदौली ग्राम सभा के चेरुईराम पट्टी गांव निवासी बब्बू का तीन वर्षीय पुत्र शिवम पिछले एक सप्ताह से बीमार चल रहा था। जिसका इलाज वह गांव के डाक्टराें से करा रहा था। गुरुवार को बालक की हालत नाजुक होने पर झोला छाप चिकित्सक ने उसे किसी अच्छे डाक्टर के पास ले जाने की सलाह दी। वह नगर में लालडिग्गी व शुक्लहा में स्थित एक निजी चिकित्सालय में गया जहां बच्चे की हालत नाजुक देख चिकित्सकाें ने उसे भर्ती करने से इंकार कर दिया। करीब आधा दर्जन चिकित्सकाें के इलाज नहीं करने पर वह थक कर जिला अस्पताल पहुंचा। बुधवार को उसने महिला अस्पताल में तैनात चिकित्सक लक्ष्मीशंकर सिंह को दिखाया तो उन्होंने बच्चे की नाजुक हालत के बारे में परिजनाें को बताया और उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराने को कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया। उधर बच्चे को भर्ती कराने के लिए परिजन जब जिला अस्पताल पहुंचे तो उसे भर्ती करने से इंकार कर दिया गया। परिजन पिछले दो दिनाें से जिला अस्पताल का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन यहां पर तैनात चिकित्सकाें द्वारा बस परिजनाें को यहीं आश्वासन दिया गया कि अस्पताल में कोई बाल रोग चिकित्सक तैनात नहीं है इसलिए वह बच्चे को भर्ती नहीं कर सकते हैं। शुक्रवार को परिजन बच्चे की बिगड़ती हालत को देखते हुए उसे लेकर दोबारा अस्पताल में आए थे। किसी तरह इमरजेंसी कक्ष में तैनात डाक्टर बच्चे को देखने के लिए राजी हुए भी तो वह अधिक देर तक उसे नहीं देख पाए। चिकित्सक के सामने ही बच्चे ने दम तोड़ दिया।