मिर्जापुर। एक तरफ देश की सर्वोच्च अदालत विवेचनाओं में विलंब को लेकर गंभीर है वहीं पुलिस के आलाधिकारियाें की सेहत पर कोई फर्क नहीं है। इसका सबसे ताजा उदाहरण जौनपुर, कौशांबी, आजमगढ़ और आगरा के एसपी हैं। इन चारों जनपदाें के पुलिस अधीक्षकाें को न्यायालय में चल रहे 25 आयुध अधिनियम से संबंधित मुकदमे के साक्ष्य में साक्षियाें की उपस्थिति नहीं कराने पर सीजेएम कोर्ट ने तलब किया है।
मंगलवार 21 अगस्त को भेजे गए पत्र में चाराें ही जनपदाें के पुलिस अधीक्षकाें को मुकदमाें की विवेचनाओं और साक्ष्याें के प्रति रुचि नहीं दिखाने की बात कहीं गई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अनिल कुमार शुक्ल ने पुलिस महानिदेशक लखनऊ से अनुरोध किया है कि संबंधित पुलिस अधीक्षक जौनपुर, पुलिस अधीक्षक कौशांबी, पुलिस अधीक्षक आजमगढ़ और एसपी आगरा को अपने माध्यम से निर्देशित करें कि वह पांच सितंबर 2012 को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित हों। कोर्ट में आकर कारण स्पष्ट करें कि क्यों न उनके विरुद्ध विधिक कार्यवाही करने के लिए उच्च न्यायालय को पत्र लिखा जाए।
ज्ञात हो कि आपराधिक वाद संख्या 821 सन 1998 राज्य बनाम अनिल कुमार त्रिपाठी धारा 25 आयुध अधिनियम थाना कटरा से संबंधित मामला कोर्ट में चल रहा है। जिसमें उच्च न्यायालय के आदेशानुसार इस वाद को आठ माह के अंदर निस्तारित करने का निर्देश दिया गया है। बार-बार आदेशिकाएं/फैक्स जारी करने के बावजूद भी संबंधित जिलाें के पुलिस अधीक्षक के द्वारा साक्ष्याें के प्रस्तुत करने में कोई रुचि नहीं दिखाई। वर्तमान साक्षी हेड कांस्टेबिल प्रमोद सिंह थाना करारी जनपद कौशांबी, कांस्टेबिल रामअवतार थाना मड़ियाहूं जौनपुर व उपनिरीक्षक आरके मिश्रा जनपद आगरा तथा कांस्टेबिल रामकृत यादव आजमगढ़ जिले में नियुक्त हैं। संबंधित जिलाें के पुलिस अधीक्षकाें को इन साक्षियाें को न्यायालय में प्रस्तुत करना था लेकिन ऐसा किया नहीं गया। उनकी इस लापरवाही को मुख्य न्यायिक मस्ट्रिेट अनिल कुमार शुक्ला ने गंभीरता से लिया है। सीजेएम के इस पत्र पर पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है और पुलिस अधिकारी कोर्ट के मामलें को लेकर संजीदा होने की कोशिश कर रहे हैं।