मिर्जापुर। विकास खंड सीखड़ के तीन ग्राम पंचायतों धनैता, बिदापुर व डोमनपुर गांव में मनरेगा के तहत 28 लाख 54 हजार 651 रुपये के गबन के मामले में चार आरोपियों के खिलाफ सोमवार को कछवां थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है। सभी आरोपियों के खिलाफ गबन के बीस मामले दर्ज हुए हैं। जांच टीम ने 108 पन्नों की रिपोर्ट ग्राम्य विकास आयुक्त लखनऊ को भेजते हुए इस गबन में प्रधान, सेक्रेटरी व जेई को एक समान दोषी मानते हुए तीनों से बराबर-बराबर धन की रिकवरी कराने की सिफारिश की थी। जांच टीम की रिपोर्ट में खंड विकास अधिकारी को भी गबन के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। मनरेगा में धांधली करने के आरोप में लखनऊ की जांच टीम के रिपोर्ट के आधार पर खंड विकास अधिकारी मझवां परमात्मानंद ने चार लोगाें के खिलाफ बीस मुकदमे कछवां थाने में सोमवार की रात दर्ज कराया। समाचार लिखे जाने तक प्राथमिकी दर्ज कर करायी जा रही थी।
सीखड़ विकास खंड के समाजसेवी रविंद्र कुमार सिंह, अवधेश तिवारी और दुर्गेश चंद्र त्रिपाठी ने मनरेगा सेल लखनऊ और भारत सरकार को शिकायती पत्र भेजकर सीखड़ विकास खंड में मनरेगा के तहत करोड़ों रुपये के गोलमाल का आरोप लगाया था। इसकी जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई थी। केंद्रीय मनरेगा सेल नई दिल्ली के निर्देश पर केंद्रीय तकनीकि टीम गठित कर टीएसी प्रमुख संतोष कुमार और सहायक आयुक्त ग्राम विकास जगदीश त्रिपाठी से इसकी जांच कराई गई थी। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि कम लागत के कार्यों पर अधिक धन की संस्तुति देने के लिए खंड विकास अधिकारी भी दोषी हैं। शिकायत पर तकनिकी टीम ने जांच करके रिपोर्ट ग्राम विकास आयुक्त लखनऊ को 108 पन्ने की रिपोर्ट सौंपते हुए व्यापक अनियमितता बताया है। इस मामले में धनैता की ग्राम प्रधान, जेई आरके रंजन, ग्राम विकास अधिकारी सुरेंद्रनाथ दूबे से बराबर-बराबर धन वसूलने की सिफारिश की गई थी।