मिर्जापुर। जिले में सामुदायिक सहभागिता योजनांतर्गत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का सपना साकार होता नहीं दिख रहा है। हालत यह रही कि चालू वित्तीय वर्ष के साढ़े आठ माह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी अभी तक महज 80 समूहों का ही गठन हो पाया है। वहीं समूहों को ऋण भी उपलब्ध नहीं कराया जा सका है। विभाग कर्मचारियों की कमी का रोना रो रहा है।
सरकार की ओर से महिलाओं को स्वत: रोजगार देकर आत्मनिर्भर बनने के लिए विश्व बैंक द्वारा पोषित वर्तमान वित्तीय वर्ष में सामुदायिक सहभागिता योजना को प्रारंभ किया गया। इसमें महिला समूहों का गठन कर, उन्हें ऋण उपलब्ध कराकर स्वत: रोजगार करने का कार्य किया जाना है। योजना के तहत समूहों को कम ब्याज पर धनराशि उपलब्ध होगी। खाते में गई धनराशि के चार प्रतिशत ब्याज के बाद शेष व्याज सरकार द्वारा देय होगी। लेकिन जिले में यह योजना कर्मचारियों की कमी के कारण पटरी पर नहीं आ पा रही है। हालत यह है कि योजना के क्रियान्वयन के लिए उपायुक्त स्वत: रोजगार के अलावा जनपद व विकास खंड स्तर पर अभी तक किसी भी अधिकारी व कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं हो सकी है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि योजनांतर्गत कितना कार्य हुआ है। हालांकि विभाग द्वारा 80 महिला समूहाें का गठन किया गया है। लेकिन उनको स्वत: रोजगार के लिए ऋण उपलब्ध नहीं कराया जा सका है।
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समूहों को 10 लाख तक मिलेगा ऋण
सीआरपी योजनांतर्गत महिला समूहों को 10 लाख तक का ऋण देने का प्रावधान है। इसमें लाभार्थी द्वारा ली गई धनराशि के ब्याज का चार प्रतिशत लाभार्थी को देना होगा। शेष ब्याज सरकार खुद वहन करेगी।
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पुराने महिला समूह भी शामिल
कर्मचारियों के कमी के कारण विभाग द्वारा पुराने महिला समूहों को भी योजनांतर्गत लेने का कार्य किया जा रहा है। विभाग पुराने महिला समूहों के सत्यापन का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। विभाग की ओर से 250 पुराने महिला समूहों के जांच का कार्य किया जा रहा है।
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उपायुक्त स्वत: रोजगार अधिकारी सुशील कुमार ने बताया कि कर्मचारियों की कमी के कारण समूहों का गठन का कार्य सुचारु रूप से नहीं हो पा रहा है। जनपद व विकास खंड स्तर पर अधिकारी व कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि गठित महिला समूहों को शीघ्र ही ऋण उपलब्ध करा दिया जाएगा।