मिर्जापुर। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की मिर्जामुराद के खजुरी में प्रस्तावित रैली पर पड़ोसी मिर्जापुर और सोनभद्र संसदीय सीट का नया परिसीमन प्रस्ताव भारी पड़ रहा है। जहां एक तरफ प्रदेश स्तरीय नेता भारी भीड़ जुटा कर पार्टी को पूर्वांचल में संजीवनी देने के अभियान में जुटे हैं। वहीं मिर्जापुर व सोनभद्र में अब तक जीजान से चुनावी तैयारियों में जुटे नेता व कार्यकर्ता चुनाव आयोग के नए प्रस्ताव से पूरी तरह से शिथिल नजर आ रहे हैं। हालत यह है कि नमो की रैली के लिए यह नेता न तो कार्यकर्ताओं को ले जाने के लिए गाड़ियों के प्रबंध में ही रुचि ले रहे हैं और ना ही जनसंपर्क कर भीड़ के जुटने का आह्वान कर रहे हैं।
20 दिसंबर को मिर्जामुराद के खजुरी में लगभग तीन लाख लोगों की क्षमता वाले मैदान से भाजपा पूर्वांचल में लोकसभा चुनाव की तैयारियों का शंखनाद करने जा रही है। इसके लिए पार्टी पूर्वांचल के सभी जिलों से भारी भीड़ को कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाने के लिए जुटी हुई है। मिर्जामुराद के बगल में मिर्जापुर और सोनभद्र जनपद से शीर्ष भाजपा नेताओं को भारी संख्या में कार्यकर्ताओं के आने की उम्मीद है। लेकिन हाल ही में चुनाव आयोग ने अधिसूचना जारी कर मिर्जापुर और सोनभद्र संसदीय सीट की आरक्षण स्थिति बदले जाने का प्रस्ताव सार्वजनिक कर दिया। इससे अब तक दोनों जनपदों में लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे सभी दलों के शीर्ष नेता बेहद दुविधा में पड़ गए हैं। कुछ यही हाल भाजपा से भी लोकसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओं व उनसे जुड़े कार्यकर्ताओं का है। इस असमंजस की स्थिति में दोनों जनपदों के शीर्ष भाजपाई नमो की प्रस्तावित रैली को लेकर बेहद शांत नजर आ रहे हैं।
कार्यकर्ताओं की मानी जाए तो शीर्ष नेताओं के ऐसे रवैये के चलते वे स्वयं दुविधा की स्थिति में हैं। इससे रैली को लेकर जनसंपर्क भी प्रभावित हो रहा है। नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर विंध्याचल मंडल के एक ऊंची रसूख वाले नेता ने कहा कि भाई पिछले कई वर्षों से लोकसभा क्षेत्र में की गई मेहनत नए प्रस्ताव से मिट्टी में मिलती हुई प्रतीत हो रही है। अब आप ही बताइए, पहले उसे मैनेज किया जाए या रैली के लिए गाड़ियां व भीड़ का इंतजाम करें।