मिर्जापुर। मनरेगा के तहत एक भी दिन काम न मांगने वाले जाबकार्ड धारकों के विरुद्ध अब जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। योजना लागू होने के बाद पहली बार प्रशासन द्वारा रोजगार सेवकों के माध्यम से जाब कार्ड धारकों के काम मांगने की असलियत की जांच डोर-टू-डोर शुरू की गई है। जांच 15 नवंबर तक चलेगी। इस दौरान काम न मांगने वाले को काम मांगने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके बाद भी काम नहीं मांगने या करने पर उनका जाब कार्ड निरस्त कर दिया जाएगा। साथ ही गलत तरीके से मस्टररोल भरकर निकाले गए पैसे की रिकवरी की जाएगी।
फरवरी, 2006 में ग्रामीण बेरोजगारों को काम देने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना प्रदेश में संचालित की गई थी। इसके तहत जिले के ग्राम्यांचल में रहने वालों को जाब कार्ड बना कर काम देने का कार्य शुरू किया गया था। लगभग आठ वर्षाें में यह संख्या 2,81,142 तक पहुंच गई। लेकिन मनरेगा के तहत काम न मांगने वालों की कभी जांच नहीं हुई। हालत यह है कि जिले में अभी भी 2,13,049 जाबकार्ड धारकों ने एक दिन का भी काम नहीं मांगा है। जबकि 68,093 ने काम की मांग की है। इसमें से 25 हजार को काम दिया जा चुका है। वहीं 811 लोगों को 100 दिन का काम दिया गया है। ऐसे में काम न मांगने वालों की अधिक संख्या देख कर जिला प्रशासन गंभीर हो गया है। फर्जी ढंग से बगैर काम किए पैसे लेने वाले जाब कार्ड धारकों के विरुद्ध कार्रवाई भी की जाएगी। उनसे मस्टररोल भर कर लिए गए पैसे की रिकवरी की जाएगी।