मिर्जापुर। जिले में पाषाण व्यवसायियों को परमिट शुल्क पर अब वीआईपी शुल्क भी देना पड़ रहा है। प्रशासन का चाबुक पहले ही चलने से पत्थर व्यवसायी भी सहमे हुए हैं। उनकी स्थिति मरता क्या न करता वाली हो गई है। कार्रवाई की जद में आने से बचने के लिए चुपचाप वीआईपी शुल्क देने में ही वह अपनी भलाई समझ रहे हैं। चौबीस घंटे में कितना शुल्क वसूला गया इसके हिसाब-किताब का जिम्मा पाषाण विभाग के कार्यालय में तैनात कुछ बाबुओं पर है। उक्त बाबू शाम ढलते ही लखनऊ से आए लोगों को वीआईपी शुल्क का थैला पकड़ा दे रहे हैं।
पिछली सरक ार की तर्ज पर ही सूबे की वर्तमान सरकार भी पाषाण व्यवसायियों से वीआईपी शुल्क वसूल रहा है। वसूली की यह कार्रवाई एक सप्ताह पूर्व ही शुरू हुई है।
इसके लिए परमिट (एमएम-ग्यारह) जारी करने के दौरान प्रत्येक रवन्ने पर अलग-अलग वाहनों के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किया गया है। मसलन बोल्डर लदे ट्रक से चौदह सौ व ट्रैक्टर से छह सौ रुपये वीआईपी शुल्क लिए जा रहे हैं। इसी तरह बालू लदे ट्रैक्टर से दो सौ रुपये वीआईपी शुल्क के नाम पर लिया जा रहा है।
इसकी कोई रसीद भी नहीं दी जा रही है। वीआईपी शुल्क लगने के कारण बोल्डर व पटिया आदि के दामों में भी बढ़ोतरी भी की जा रही है। कुछ पत्थर व्यवसायियों का कहना है कि वीआईपी शुल्क का भार वह भला क्यों झेलें। इसलिए अब प्रति ट्रक जाने वाले माल के दाम को वह बढ़ाएंगे।