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Mirzapur News: रजिस्टर में गड़बड़ी कर की 95519 कारतूस की हेराफेरी

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मिर्जापुर। पीएसी बटालियन के हेड आर्माेरर ने लगभग 30 साल पहले कारतूस घोटाला किया था। उसकी इस घोटाले की पोल तत्कालीन सेनानायक एवं वर्तमान में एडीजी वाराणसी पीयूष मोर्डिया ने खोली थी। अब जांच के बाद विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण रजत वर्मा की अदालत ने आरोपी को सजा सुनाई है।
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नगर के पास पड़रा हनुमान में पीएसी की बटालियन है। इसी जगह हेड आर्मोरर रामधनी चौबे तैनात था। वर्ष 1992 से 2000 के बीच उसने 95519 कारतूस का घोटाला किया था। बताया जा रहा है कि एम्युनेशन रजिस्टर में घालमेल कर उसने यह घोटाला किया था। उस पर आरोप था कि कारतूस उसने नक्सलियों और माफिया को बेच दी थी। इस मामले में सात मई 2004 को 99वीं वाहिनी पीएसी के सैन्य सहायक परम हंस सिंह की तरफ से मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसके बाद 28 अगस्त 2004 को एसटीएफ के एएसपी मैन सिंह चौहान ने आरोप पत्र दाखिल किया था। इसके बाद यह मामला एसटीएफ को सौंप दिया गया। मामले की विवेचना कर एसटीएफ ने आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।उसके बाद विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण रजत वर्मा की अदालत ने 95519 कारतूस का गबन कर नक्सलियों और माफिया को बिक्री करने के मामले में मिर्जापुर स्थित पीएसी के हेड आर्मोरर रामधनी चौबे को दोषी ठहराते हुए 10 साल की कड़ी कैद और एक लाख 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। सजा दिलाने में विशेष लोक अभियोजक विक्रम शील चतुर्वेदी तथा विशेष लोक अभियोजक आलोक कुमार श्रीवास्तव ने पैरवी की।
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