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पंजीयन में आधार कार्ड से फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक

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मिर्जापुर। सरकार ने धान की खरीद के लिए किसानों का ऑनलाइन पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। अफसर किसानों से अधिक से अधिक पंजीकरण कराने की अपील कर रहे हैं लेकिन किसान उनकी बातों पर ध्यान ही नहीं रहे हैं। अभी महज 25 किसानों ने ही धान बेचने के लिए पंजीकरण कराया है। पंजीकरण की सुस्त रफ्तारी से अफसरों को संदेह है कि खरीद का लक्ष्य शायद ही पूरा हो पाए।
जनपद में धान खरीद एक नवंबर से शुरू होनी है। खरीद के समय बिचौलिए अचानक सक्रिय हो जाते हैं और किसानों से धान की खरीद हो ही नहीं पाती। इसको लेकर अक्सर विवाद होता रहा है। किसान धरना-प्रदर्शन करते थे। इसके बावजूद तमाम किसानों क्रय केंद्रों पर धान बेचने से वंचित रह जाते थे और उनको उपज का सही मूल्य नहीं मिल पाता था। किसानों की समस्या को देखते हुए सरकार ने टोकन योजना शुरू करने जा रही है। इसके लिए किसानों को आनलाइन पंजीकरण करना है। आनलाइन पंजीकरण किसानों के लिए समस्या का सबब बना हुआ है। कुछ चुनिंदा किसानों के पास ही अपनी इंटरनेट सुविधा है ज्यादातर कृषक सहज जन सेवा केंद्रों पर ही निर्भर हैं। ऐसे में उन्हें पंजीकरण में परेशानी हो रही है। गांवों में नेटवर्क भी एक बड़ी समस्या है। पंजीकरण की जटिलताओं के चलते अभी महज 25 किसानों का ही पंजीयन हो सका है। अपर जिलाधिकारी विजय बहादुर को जिला खरीद अधिकारी नामित किया गया है। सामान्य धान के लिए 1550 रुपया और ग्रेड ए धान के लिए 1590 रुपया समर्थन मूल्य निर्धारित है। इस वर्ष 2017-18 में किसानों से धान खरीद के लिए 85 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। मगर पंजीकरण में किसानों की रुचि कम होने के कारण अफसर चिंतित हैं।
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धान खरीद के लिए किसानों से ऑनलाइन पंजीयन कराया जा रहा है। पंजीकरण कराने के लिए खसरा अथवा खतौनी, जोतबही, आधार कार्ड, मतदाता कार्ड और फोटो युक्त बैंक पास बुक की छाया प्रति जरूरी है। - विजय बहादुर, एडीएम व धान खरीद अधिकारी।
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