मिर्जापुर। बेसिक शिक्षा परिषद से संचालित परिषदीय विद्यालयों में प्राक्सी टीचर सिरदर्द बने हुए हैं। ऐसे प्राक्सी टीचरों और उनको संरक्षण देने वालों के खिलाफ जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण कुमार तिवारी ने कार्रवाई करना शुरू कर दी है।
बीएसए ने सात जुलाई को पता चला कि पूर्व माध्यमिक विद्यालय धनीपट्टी में तैनात सहायक अध्यापिका रागिनी गौड़ चार वर्षों से विद्यालय आई ही नहीं। अब इस मामले की जांच की जा रही है कि उन्होंने इस दौरान वेतन लिया है अथवा नहीं। बेसिक शिक्षा विभाग में प्राक्सी टीचर अर्थात घर बैठे वेतन लेने वाले अध्यापक एक समस्या बने हुए हैं। इन प्राक्सी टीचरों के चलते शिक्षा व्यवस्था बदहाल हो गई है। सपा सरकार में सुर्खियों में रहा मिर्जापुर बीएसए कार्यालय में चेहतों के लिए नियमों को दरकिनार कर दिया जाता था। बेसिक शिक्षा विभाग में राजनेता, अधिकारी वर्ग सहित प्रभावशाली लोगों के परिचितों ने स्कूल जाने की जहमत नहीं उठाई। अपने प्रभाव के चलते और कुछ तो कृपा के चलते घर बैठे ही तनख्वाह ले रहे थे। बीएसए ने परिषदीय स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और शिक्षकों की उपस्थिति को दुरुस्त करने का बीड़ा उठाया है। प्राक्सी टीचरों की पहचान के लिए शिक्षकों का विवरण फोटोग्राफ सहित नोटिस बोर्ड पर चस्पा कराने का निर्देश बीईओ को दिया है, जिससे अभिभावक और जनता को तैनात शिक्षकों के बारे में जानकारी मिल सके। बीएसए ने सभी शिक्षकों को स्पष्ट संदेश दिया है कि नौकरी करनी है तो पढ़ाना होगा अन्यथा अब घर वापस जाना होगा।