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खर-पतवार व कूड़ा रखने में हो रहा शौचालय का प्रयोग

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मिर्जापुर। जिले के 12 ब्लाकों में शौचालय का निर्माण करवाकर ओडीएफ घोषित करना छलावा साबित हो रहा है। वर्तमान समय में शौचालयों के अभाव में बड़ी संख्या में लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं। प्रशासन जनपद को ओडीएफ घोषित करने का दावा कर रही है, लेकिन ओडीएफ की हकीकत बने हुए आधे-अधूरे शौचालय बयां कर रहे हैं। कहीं पर पाटन नहीं हुआ है तो कहीं शौचालय में दरवाजा ही नहीं लगा है। यही नहीं, कहीं-कहीं तो शौचालयों का प्रयोग खर-पतवार व कूड़ा फेंकने के लिए हो रहा है।
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जमालपुर प्रतिनिधि के अनुसार ग्रामसभा जमालपुर के राजस्व ग्राम सेमरा में अमरनाथ, लक्ष्मी तथा बलिराम द्वारा शौचालय का प्रयोग नहीं किया जा रहा है। इनका शौचालय आधा-अधूरा बना है। लाभार्थी द्वारा खरपतवार व कूड़ा फेंकने के रूप में शौचालय का प्रयोग किया जा रहा है। विभाग द्वारा जमालपुर ग्राम पंचायत को शौच मुक्त घोषित कर दिया गया है लेकिन हकीकत कुछ और बयां कर रही है। छानबे प्रतिनिधि के अनुसार विकास खंड छानबे भी ओडीएफ घोषित है लेकिन अभी भी शौचालय आधे-अधूरे ही बने हैं। शौचालय के अभाव में लोग खुले में शौच करते देखे जा सकते हैं। कुछ शौचालय तो बने हैं। गड्ढा नहीं बनाए जाने से उसे स्टोर रूम बना दिया गया है।
लालगंज प्रतिनिधि के अनुसार विकास खंड के अधिकांश शौचालयों में पानी भी नदारद है। इससे लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैें। कहने को टिंगरिंग टीम का गठन किया गया है। जिसके यहां निजी शौचालय बने है, वही शौचालय का प्रयोग कर रहे हैं। हलिया प्रतिनिधि के अनुसार विकास खंड के गांवों में बहुतायत शौचालय बनने के बावजूद लोगों की खुले में शौच करने की प्रवृत्ति नहीं बदल रही है। लोगों का कहना है कि शौचालय में शौच करने की आदत नहीं होने की वजह से कुछ लोग खुले में शौच कर रहे हैं। उधर, गांवों में कई जरूरतमंद लोगों को अभी तक शौचालय मिल भी नहीं पाया है। इन्हीं कारणों से ओडीएफ घोषित होने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्र में खुले में शौच करने की प्रवृत्ति पर रोक नहीं लग पा रही है। चुनार प्रतिनिधि के अनुसार ब्लॉक नरायनपुर अंतर्गत भरेहठा गांव निवासी छबलू पुत्र दयाराम ने बताया कि पानी के अभाव में शौचालय का उपयोग नही हो पा रहा है। प्रधान दिलीप कुमार सिंह का का कहना है कि गांव में निगरानी टीम के माध्यम से लोगों को शौचालय का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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