चुनार। ऐतिहासिक चुनार दुर्ग का रखरखाव ठीक ढंग से नहीं किए जाने के कारण किले का वास्तविक स्वरूप बिगड़ता जा रहा है। दुर्ग की दीवारें जगह-जगह दरक गई है लेकिन इस पर पुरातत्व विभाग का ध्यान नहीं है। अगर मरम्मत नहीं की गई तो दुर्ग का अस्तित्व खत्म हो जाएगा।
चुनार दुर्ग के पश्चिमी द्वार से बूढ़ेनाथ मंदिर जाने वाले मार्ग से सटे किले की नींव के लिए बनाई गई सुरक्षा दीवार जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गई है। दुर्ग के बूढ़ेनाथ मंदिर तिराहे तक बने रास्ते से लोगों का कम आना जाना होता था, लेकिन पूर्वी द्वार से आवागमन पर रोक लग जाने के बाद अब किले में जाने का यह मुख्य मार्ग बना दिया गया है। इसी मार्ग से दुर्ग पर भ्रमण करने वाले लोग आते जाते हैं। किले की नींव को सुरक्षित रखने के लिए इस मार्ग के किनारे पत्थर की मोटी दीवार बनाई गई है, जिससे कि किले की नींव को सुरक्षित रखा जा सके। पत्थर की मोटी दीवार उचित रखरखाव के अभाव में जगह जगह क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे किले की दीवार को खतरा बना हुआ है। इसके साथ ही दीवारों पर उगे झाड़ झंखाड़ भी दीवार को खतरा पहुंचाने का काम कर रहे हैं। टेकौर तिराहे से दुर्ग पर जाते समय यह क्षतिग्रस्त दीवार साफ नजर आती है। इसी मार्ग से दुर्ग पर सरकार के जन प्रतिनिधियों व विभाग के अधिकारियों का भी आना जाना भी लगा रहता है लेकिन उन्हें भी दुर्ग की यह दरकती दीवारें नजर नहीं आ रही हैं। यदि सरकार के जनप्रतिनिधियों एवं पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने दुर्ग की दरकती दीवार की मरम्मत नहीं कराई तो प्राचीन दुर्ग को भारी क्षति पहुंचने से इंकार नही किया जा सकता है।