चुनार। पीतल बर्तन उद्योग और चुनार की लाल मिट्टी, बलुआ पत्थर से बने उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान मिलेगी। इसके लिए प्रयास किया जा रहा है। सरकार की मंशा है कि सभी शिल्पकारों का पंजीकरण हो ताकि उनकी पहचान बन सके। ये बातें केंद्रीय परिवार कल्याण मंत्री अनुप्रिया पटेल ने शनिवार को वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार, आयुक्त विकास वाराणसी की ओर से नगर के शिवा उत्सव वाटिका में आयोजित हस्तशिल्प सहयोग शिविर का उद्घाटन करने के बाद कही।
उन्होंने कहा कि सरकार हस्तशिल्पियों को आर्थिक मदद के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा लोन की व्यवस्था की है। शिल्पी बीमा जैसी योजनाओं को संचालित कर हस्तशिल्प से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ शिल्पकारों के बच्चों की शिक्षा पर ध्यान दिया जा रहा है। इसके अलावा हस्तशिल्पियों को बिजली से चलने वाली चाक दिलाने के लिए सरकार से वार्ता की जाएगी। शिल्पकार रामचंद्र प्रजापति ने मुख्य अतिथि को लाल मिट्टी से निर्मित कलमदान भेंट किया। मुख्य अतिथि ने स्टाल पर लगाए गए लाल मिट्टी के बने बर्तन, खिलौने आदि को देखा। इस दौरान शिविर में हस्तशिल्प से जुड़े लोगों का पंजीकरण एवं बीमा करने के साथ ही नगर के गंगा देवी, सोमेश्वर प्रसाद व हेमंत कुमार सहित कुल दो सौ हस्तशिल्पियों को शिल्पी कार्ड वितरित किया। शिविर में ह्यूमन वेलफेयर एसोसिएशन जीआई विशेषज्ञ डा. रजनीकांत ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर हस्तशिल्प उद्योग को विकसित करने की जरूरत है। दक्ष शिल्पियों को पुरस्कृत करने के साथ ही उन्हें नए तरीके से प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस दौरान अपना दल (एस) के जिलाध्यक्ष रमाकांत पटेल, प्रदेश महासचिव अनिल सिंह, मंडल अध्यक्ष मेघनाथ पटेल, राजेंद्र प्रसाद प्रजापति, समर्थ सिंह, अभय कुमार, अनूप श्रीवास्तव, सुनील जैन, डी. डी. नावार्ड, राजन वर्मा, रेनू श्रीवास्तव, डा. संजय सिंह, सभासद राधेश्याम पटेल,अनिल कुमार सिंह, बबली आदि मौजूद रहे।