प्रदेश सरकार द्वारा विद्युत दरों में की गई बढ़ोत्तरी को लेकर गांव से लेकर शहर तक के लोगों में उबाल है। किसान, व्यापारी और नगरीय क्षेत्र में रहने वाले आम लोगों ने गहरा आक्रोश जताया है। राजनीतिक दलों ने भी इसका पुरजोर विरोध कर बढ़ी दरों को तत्काल वापस लेने की मांग कर रहे हैं। प्रदेश में शनिवार से विद्युत दरों में की गई बढ़ोत्तरी को लागू कर दिया गया है। विद्युत दरें बढ़ने के बाद शहरी क्षेत्र में निवास करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को 10 रुपया प्रति किलोवाट और 45 से 50 पैसा प्रति यूनिट की दर से अतिरिक्त भुगतान करना पड़ेगा। कमरतोड़ महंगाई की मार और बेरोजगारी तंग आम जनता में इसको लेकर काफी उबाल है। वहीं, खेती किसानी करने वाले ग्रामीणों का कहना है कि विद्युत दरों को बढ़ाने से खेती पर असर पड़ेगा। इतनी बढ़ोत्तरी करने के बाद भी प्रदेश सरकार एक अप्रैल से बिजली दरों में और बढ़ोत्तरी करने के संकेत दिए हैं।
कामर्शियल बिजली उपभोक्ता अनुपम सिंह का कहना है कि प्रदेश सरकार द्वारा बिजली दरों में इजाफा करने से महंगाई में वृद्घि होगी। नगर के साधवाड़ा के रहने वाले घरेलू उपभोक्ता दिलीप साध कहते हैं कि बिजली की दरें पहले ही काफी बढ़ी हुई हैं, दरों में की गई बढ़ोत्तरी से बिजली जलाना मुश्किल हो गया है। नगर के चिनिहवां ईनारा निवासी राज सिंह का कहना है कि इस महंगाई में बिजली की दरों में की गई बढ़ोत्तरी से पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ से बजट प्रभावित होगा। कछवां नगर पंचायत के जलालपुर गांव निवासी मनोज सिंह का कहना है कि इसका सीधा असर खेती पर पड़ेगा। खेती की लागत तो बढ़ेगी, लेकिन फसलों की कीमत वही मिलेगी। इससे किसानों का नुकसान होना लाजमी है। ग्राम पंचायत हसौली के रंगनाथ द्विवेदी कहते हैं कि बिजली की दर बढ़ाने से किसान, छोटे-बड़े कारोबारी एवं आम उपभोक्ता परेशान है। उन्होंने कहा कि बिजली दरों में बढ़ोत्तरी से सरकार किसानों पर दोहरा मापदंड अपना रही है। एक तरफ आय दोगुना करने की बात कर रही है तो दूूसरी ओर बिजली की दरें बढ़ा रही हैं। बजहां गांव निवासी राजकुमार उपाध्याय का कहना है कि बिजली दर को लेकर किसानों में खासा आक्रोश है। किसान नेता बढ़ी बिजली दर के खिलाफ आंदोलन करेंगे। किसानों का कहना है कि खेती में प्रयुक्त अधिकांश उपकरण बिजली से चलते हैं, बिजली के रेट बढ़ने से खेती प्रभावित होगी। मड़िहान निवासी किसान दीपक कुमार सिंह का कहना है कि कहीं 18 घंटे तो कहीं आठ घंटे बिजली दी जा रही है लेकिन बिल बराबर लिया जा रहा है। डेढ़ गुना से अधिक बिजली का बिल बढ़ने से किसानों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। कई प्रांतों में किसानों को मुफ्त बिजली मिल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के साथ वादाखिलाफी कर रही है। जिगना क्षेत्र के सिहावल गांव निवासी किसान देवेंद्र दुबे का कहना है कि बिजली बिल की बढ़ोत्तरी से किसानों पर अनावश्यक बोझ बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि किसानों को नि:शुल्क बिजली मिलनी चाहिए।