मान्यता नहीं होने से उनको सरकार की ओर से कोई वित्तीय सहायता भी नहीं मिलती है। इस प्रकार के मदरसे निजी संसाधनों व दूसरों की सहायता से ही संचालित किए जा रहे हैं। जिले के लालगंज तहसील के जिस मदरसे में सर्वे के दौरान एक भी बच्चे नहीं मिले, वहां भवन तो मिला, लेकिन न तो पेयजल की सुविधा थी और न ही शौचालय आदि की सुविधा थी।
प्रभारी जिला अल्प संख्यक कल्याण अधिकारी रमेश का कहना है कि शासन के निर्देश पर बिना मान्यता वाले मदरसों का सर्वे कराया गया था। उसमें बिना मान्यता वाले आठ मदरसों के बारे में जानकारी मिली है। इसकी रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। शासन का इस संबंध में अभी कोई दिशा-निर्देश नहीं आया है।
मिर्जापुर जिले में केंद्र पूरोनिधानित मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत वर्ष 2009-10 में 143 मदरसों को मान्यता दी गई थी। इसमें 14 मदरसे फर्जी व अनियमित पाए गए थे। इनका न तो भवन है और न ही प्रबंधन। जबकि इन मदरसों को करोड़ों रुपये अनुदान में दिए जा चुके हैं। इन मदरसों की एसआईटी की जांच हुई थी और तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को निलंबित भी किया गया था।