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गुरु दीक्षा बिना हर कर्म अधूरा

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मड़िहान। स्थानीय कस्बा स्थित देवरी मार्ग पर दूसरे दिन सोमवार को संगीतमय श्रीमदभागवत कथा में कथावाचक स्वामी जगदीशानन्द महाराज द्वारा अमरकथा का वर्णन किया गया। ध्रुव जैसे महान बालक की व्याख्या करते हुए कहा कि यदि हर घर मे ज्ञानशील बालक हो जाएं तो त्रेता द्वापर युग जैसा भक्तिमय का वातावरण बन जायेगा। भारत वर्ष अधर्म के आगोश में खड़ा है। ध्रुव पांच वर्ष की अवधि में ही परमात्मा की प्राप्ति के लिए अपने निर्मल मन को लगा दिया।
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ध्रुव जैसे बालक को पांच वर्ष की अवधि में नारद जैसे गुरु की दीक्षा मिली। गुरु दीक्षा के बिना हर कर्म अधूरा है। भगवान,ज्ञान ब्रम्हा और आत्मा के रूप का निरूपण करते हैं जो विशुद्ध है। भक्ति राग है,श्रद्धा ही भक्ति नही है,क्यों कि श्रद्धा कर्मादिकों में भी होती है। सात्विक भक्ति वृत्ति स्वरूप वित्त की एकाग्रता समाधिय संप्रज्ञान योग से जानी जाती है। एक बार अगर गीता का भाव साक्ष्य हो जाय तो ध्रुव जैसी परमगति सामने दिखाई देगी। ध्रुव कथा का प्रसंग भक्तों ने ध्यान पूर्वक श्रावण किया। संगीतकार बृंदावन आचार्य पण्डित बालमुकुन्द द्विवेदी, आर्गन अनिल भरद्वाज,पैड संगत संजय सिंह, तबलावादक अनिल सोनी,आचार्य मोहन लाल तिवारी,व्यासगद्दी राम प्रसाद तिवारी, अध्यक्ष गोपाल सेठ, प्रबंधक राजेश सिंह, बीनू चौरसिया, संरक्षक जनार्दन सिंह कार्यक्रम व्यवस्थापक कन्हैया लाल सेठ,सूर्यप्रताप सिंह, रमेश मिश्रा,चंदा गुरु आदि स्रोतागण उपस्थित रहे।
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