फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मां विंध्यवासिनी के जयघोष से गूंजा विंध्यधाम

विज्ञापन
विज्ञापन
विंध्याचल। साव के दूसरे मंगलवार को मां विंध्यवासिनी का गुड़हल, कमल, गुलाब पुष्प और रत्नजड़ित आभूषणों से भव्य शृंगार किया गया। इस दौरान मां के दर्शन पूजन को बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े थे। हाथों में नारियल-चुनरी सहित प्रसाद लिए दर्शन को कतार में लगे श्रद्घालु मां का जयकारा लगाते रहे। घंटा-घड़ियाल, शंख एवं माता के जयघोष से विंध्यधाम देवीमय हो गया। विंध्य की सातों गलियों में श्रद्धालुओं ने खरीदारी की। इसके अलावा मां काली एवं मां अष्टभुजी देवी के दर्शन के लिए श्रद्धालु उमड़े रहे।
विज्ञापन

श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार व मंगलवार को विंध्याचल में देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में दर्शनार्थी देवीधाम में अपनी हाजिरी लगाने पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में मंगलवार को पावन विंध्याचल दरबार में पहुंचे श्रद्घालुओं ने मंदिर पहुंचकर बड़े ही श्रद्घाभाव से मंदिर में मत्था टेककर सुख-समृद्घि की कामना की। नारियल-चुनरी, माला-फूल, प्रसाद, रोरी-रक्षा लेकर मां के दरबार में पहुंचे भक्तों ने विधिवत दर्शन-पूजन किया। विंध्याचल के गंगा घाटों पर स्नान करने केी लिए भोरस्त्रत्त् से दोपहर बाद तक स्नानार्थियों का तांता लगा रहा। दोपहर में मां की आरती के समय कपाट बंद होने के कारण श्रद्घालु अपने-अपने प्रसाद को लेकर कतार में जहां खड़े थे, वहीं बैठकर माता के कपाट खुलने का इंतजार करते रहे। भव्य आरती के उपरांत मां का कपाट खुलते ही देवी मां के जयकारे से पूरा धाम परिसर गुंजायमान हो उठा। मां विंध्यवासिनी के दर्शन-पूजन के बाद आस्थावानों ने मंदिर परिसर में विराजमान सभी देवी-देवताओं के मंदिरों में जाकर पूजन-अर्चन कर मंगलकामना की। विंध्याचल मंदिर के साथ ही पहाड़ पर विराजमान मां काली व मां अष्टभुजी देवी के मंदिर में पहुंचकर भक्तों ने शीश झुकाया। आसमान साफ होने के बाद भी नर-नारी व बच्चों पर तल्ख धूप का जरा भी असर नहीं दिखाई दे रहा था, सभी मां की भक्ति में तल्लीन दिखे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें