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करूणा बरसाओ हे भवानी आ भी जाओ..पर झूमे

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विंध्याचल। मां विंध्यवासिनी के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में भाद्र कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि पर मां के दरबार में भव्य देवी जागरण का आयोजन किया गया। इसमें कला साधकों ने मां के चरणों में अपनी प्रस्तुतियां अर्पित कीं। श्री मां विंध्यवासिनी सेवा समिति की ओर से मां का शृंगार-पूूजन, दीपदान, भोग प्रसाद वितरण एवं भंडारे का आयोजन किया गया। इसके अलावा श्रद्धालुओं ने भव्य झांकियों के दर्शन किए। ,
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देवी जागरण के आरंभ में संस्था संस्थापक पं. मोहित मिश्र ने मां विंध्यवासिनी का पूजन-अर्चन कर किया। जयंती सिंह ने गणेश वंदना प्रस्तुत की। जौनपुर से आए रविंद्र सिंह ज्योति ने नीमिया के डाढ़ मइया.. सुनाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इलाहाबाद की जूली सिंह ने करुणा बरसाओ हे भवानी आ भी जाओ..और जगदंबा घर में दीयना बार अइली हो..सुनाकर मां की आराधना की। लखनऊ से आए संजय यादव ने विंध्याचल में आके बस गइली हो कान्हा की बहिनियां..प्रस्तुत कर भक्तों को खूब झूमाया। इलाहाबाद के कुमार बादल ने हर जनम में मइया तेरा साथ चाहिए.. सुनाकर लोगों को मुग्ध कर दिया। संचालन करते हुए विंध्याचल के कलाकार रविशंकर शास्त्री ने जय अबे भवानी..प्रस्तुत किया। वाराणसी की स्नेहा अवस्थी ने सत्यम शिवम सुंदरम और तेरे दर पे आने को जी चाहता है..सुनाकर वाहवाही लूटी। मुंबई से आई कस्तूरी व प्रदीप सिंह ने भजनों से भक्तों को खूब झूमाया। बाबी एंड ग्रुप के कलाकारों ने राधा-कृष्ण व शिवजी की भव्य झांकियों से मन मोह लिया। संस्था संस्थापक मोहित मिश्र एवं अध्यक्ष गौतम द्विवेदी, मंत्री भाष्कर भट्ट, कोषाध्यक्ष बादल मिश्रा ने कलाकारों को अंगवस्त्रम भेंटकर सम्मानित किया। संस्था के संस्थापक मोहित मिश्र ने आभार व्यक्त किया। इस मौके पर श्री विंध्य पंडा समाज के अध्यक्ष राजन पाठक को अंगवस्त्रम भेंटकर संस्था ने सम्मानित किया गया। इस मौके पर राकेश रंजन, वीपी दूबे, प्रेम मिश्रा, सियाराम सिंह, मोहित, रोहित अग्रवाल, सुघीर,,अशोक पांडेय, अरुण सिंह, सुनील सिंह, ओपी दूबे मौजूद रहे।
फूलों से सजाया गया मंदिर : विंध्याचल। मां विंध्यवासिनी सेवा समिति के तत्वावधान में वार्षिक आयोजन के तहत देवीधाम में आयोजित भव्य देवी जागरण के दौरान मंदिर को भव्य तरीके से सजाया गया था। विंध्याचल के राजकुमार श्रीमाली के नेतृत्व में मंदिर को तरह-तरह के पुष्पों से बड़े ही आकर्षक ढंग से सजाया गया था, जो एक अलौकिक छटा बिखेर रही थी। देवी मंदिर का तरह-तरह के पुष्प-पत्तियों सहित रंगीन गुब्बारा एवं चुनरी से की गई सजावट देखते बन रही थी। वहीं मंदिर परिसर में किया गया दीपदान अलौकिक छटा बिखेर रहा था। देर रात तक मां विंध्यवासिनी के भव्य स्वरूप का दर्शन-पूजन करने को तांता लगा रहा।
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