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गड़बड़ा शीतला धाम के अंतिम गवईहवा मेले में उमड़ा भक्तो का सैलाब

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हलिया, ड्रमंडगंज। उपरौध क्षेत्र की ग्रामीण लोक संस्कृति का प्रतीक गड़बड़ा शीतला धाम में लगने वाला पंद्रह दिवसीय मेले का सोमवार को समापन हो गया। पखवाड़े भर के देहाती मेले के अंतिम दिन करीब एक लाख श्रद्धालुओं ने मां का दर्शन पूजन किया। सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किए गए थे। अंतिम मेले में दूरदराज से आए ग्रामीण भक्तों ने गृहस्थी के आवश्यक वस्तुओं की जमकर खरीदारी की।
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गड़बड़ा धाम में मां शीतला मंदिर पर अंतिम देहाती मेले में भक्तों की उमड़ पड़ी। सुबह चार बजे भोर से ही भक्त गोकुल गड़बड़ा स्थित सेवटी नदी के किनारे स्थित मां शीतला मंदिर में दर्शन के लिए कतारबद्घ हो गए। भीड़ को संभालने में पुलिस प्रशासन लगी रही। श्रद्घालुओं ने मां के दर्शन कर मन्नते मांगी। गड़बड़ा धाम में भक्तों ने हलुआ, पूड़ी, नारियल, माला एवं फूल मां के चरणों में चढ़ाए। मेले में पूरी की गंवई गांव के भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी रही। मेले में आस पास के जिलों के भक्तों ने भी धाम में आकर मां के दरबार में मत्था टेका। मेले में लाई, गुड़, बांस के बर्तन, जलेबी एवं खिलौनों की दुकानें सजी रही। बच्चों के लिए झूला भी लगाया गया था, जिसमें बच्चों ने झूला झूलकर आनंद उठाया। तमाम अव्यवस्थाओं के बाद भी मेले में श्रद्धा और भक्ति का वातावरण बना रहा। इस दौरान मेले में आए हुए भक्त व्यवस्था की खामियां भी गिनाते देखे गए। लोगों का कहना था कि शीतला धाम का मेला ग्रामीण लोक संस्कृति का प्रतीक बना हुआ है, लेकिन जिला प्रशासन इस विराट मेले में आने वाले भक्तों को मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराना मुनासिब नहीं समझता। मंदिर के प्रबंधक प्रकाश चंद्र शुक्ला मेला की व्यवस्था में लगे रहे।
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