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मंडलीय चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. ओपी शाही किए गए निलंबित

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मिर्जापुर। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य प्रशांत त्रिवेदी ने शनिवार की देर रात विवादों से रहे मंडलीय चिकित्सालय के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. ओपी शाही को निलंबित कर दिया। जिले के नोडल अधिकारी व प्रमुख सचिव पिछड़ा वर्ग कल्याण महेश गुप्ता ने शनिवार दोपहर निरीक्षण के दौरान उन्हें कड़ी फटकार लगाई थी। उन्होंने शासन को भ्रष्ट बताया था। उन पर मरीजों से अवैध तरीके से धन वसूलकर गबन करने और दवाओं को जलवाने सहित कई आरोप लगाए गए हैं। उनकी जगह डा. प्रदीप को कार्यभार सौंपा गया है।
प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. ओपी शाही ने 22 नवंबर 2016 को मंडलीय चिकित्सालय के एसआईसी का पद ग्रहण किया था। उनका लगभग दस महीने का कार्यकाल विवादों में घिरा रहा है। कर्मचारियों और चिकित्सकों से गालीगलौज करना और महिला कर्मचारियों से भी अभद्रता के आरोप लगे। अस्पताल के दफ्तर के बजाय अपने आवास पर ही कैंप कार्यालय बना लिया था। वहीं कर्मचारियों से हाजिरी लगवाने लगे थे। इसके खिलाफ जून महीने में गुस्सा फूट पड़ा था। चिकित्सकों और कर्मचारियों ने हड़ताल तक की। अस्पताल और कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। सूबे में सरकार बदलने के बाद उन्होंने बगैर किसी शासनादेश के 34 रुपया भर्ती शुल्क लगा दिया और प्राइवेट वार्ड में भर्ती मरीजों से 100 रुपये के बजाय 167 रुपये चार्ज लेना शुरू कर दिया। अवैध तरीके से साइकल स्टैंड चलवाने के साथ साथ निजी गार्ड की तैनाती भी कर दी।
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उनके कार्यकाल में इमरजेंसी में दो बार डाक्टरों व कर्मचारियों में मारपीट हुई। छह लोगों पर मुकदमा भी हुआ। इसके अलावा मरीजों द्वारा भी चिकित्सकों को इलाज में लापरवाही बतरने के आरोप डाक्टरों से साथ मारपीट की गई। चिकित्सालय की व्यवस्था को तहस नहस कर दिया। अस्पताल का एक गेट बंद करा दिया और विधायक, जिलाधिकारी के कहने पर भी नहीं खुलवाया। अवनी परिधि का कर्मचारियों का वेतन रोक दिया और एड्स नियंत्रण में तैनात सविंदाकर्मी, लैब टेक्निशियन को मनमाने तरीके से हटा दिया।
चिकित्सकों का कराया स्टिंग
मिर्जापुर। एसआईसी ने 24 डाक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस करने का स्टिंग आपरेशन करा डाला। इसमें 19 डाक्टरों की सूची शासन को कार्रवाई के लिए भेज दी। डाक्टरों के आवासों समेत पूरे परिसर में सीसीटीवी कैमरा लगवाकर निगरानी करने लगे। इससे प्राइवेट प्रैक्टिस पर तो रोक लगी ही मनमाने तरीके से ड्यूटी करने वाले चिकित्सक भी निर्धारित अवधि तक अस्पताल में बैठने लगे। परिसर में कार्यक्रम आयोजित करने पर सीएमओ डा. उमेश यादव से भी उनकी नोकझोंक हुई। मगर खुद भी एक स्टिंग आपरेशन में शासन को लाखों रुपये देने का बयान देकर फंस गए।
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कराया तबादला
मिर्जापुर। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल के पति व अपना दल एस के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष पटेल से लालगंज में एक कुएं में जहरीली गैस से हुई चार लोगों की मौत के मामले में पूछताछ करने पर डा. शाही भिड़ गए थे। उसके बाद राज्यमंत्री ने शासन में पत्र लिख कर इनका स्थानांतरण लखनऊ निदेशालय में करा दिया। इसके बावजूद वे यहां से नहीं गए। शनिवार की दोपहर प्रमुख सचिव पिछड़ा वर्ग कल्याण महेश गुप्ता से निरीक्षण के दौरान लोगों ने शिकायत तो उन्होंने कहा कि जब कोई चार्ज ही लेने वाला नहीं है तो जाऊं कैसे। प्रमुख सचिव ने लखनऊ निदेशालय में बात की थी।
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