मिर्जापुर। आरक्षण से दलितों का कोई भला होने वाला नहीं है। सरकार दलितों का जीवन स्तर सुधारने और उन्हें रोजगार देने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना चलाई जा रही है। लक्ष्य है कि इस योजना से दलित बाहुल्य इलाकों में कम से कम एक दलित लाभान्वित हो और दलित वर्ग रोजगार की तरफ उन्मुख हो। ये बातें अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के चेयरमैन डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने मंगलवार को सर्किट हाउस में पत्रकारों बातचीत के दौरान ये बातें कहीं। इससे पहले उन्होंने विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर दिशानिर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ दलितों के आर्थिक मुद्दे को लेकर काफी गंभीर हैं। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन योजना के तहत सभी वर्गों के लिए 25 लाख तक की धनराशि देने का प्राविधान है। सरकार चाहती है कि दलित रोजगार से जुड़ें। जिनके पास जमीन, रोजगार नहीं है उनको आरक्षण एकमात्र सहारा था। देश में दलितों की आबाद ीलगभग 25 करोड़ है। दलितों का आरक्षण से कोई भला नहीं होगा। पूरे देश में आरक्षण के लगभग सरकारी पद दो करोड़ है। इसमें लगभग 44 लाख आरक्षण के पद हैं। इसलिए दलितों की बदहाली नहीं रुक पा रही है। प्रधानमंत्री ने दलितों के लिए एक नया दरवाजा खोला है। पूरे प्रदेश में जाकर अपने विभाग और दलितों से बातचीत कर रहे हैं, जिससे उन्हें लाभ दिलाया जा सके। योजनाओं के क्रियान्वयन में बैंक बाधा बन रहे हैं। इसके लिए बैंकर्स के साथ लखनऊ में बैठक होगी, जिसमें समस्या का निराकरण निकालने का प्रयास किया जाएगा। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में आरक्षण का मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उठाया है। कहा कि इस विश्वविद्यालय के प्रशासन ने दलितों की तीन पीढ़ियों के साथ छल किया। दलितों को आईएएस, प्रोफेसर आदि बनने से रोका। 1920 में एएमयू की स्थापना संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत की गई थी। ऐसे में यह अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय नहीं है।