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25 ग्राम पंचायतों के 43 गांव मॉडल के रूप में होंगे विकसित

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ग्राम पंचायतों को पूरी तरह से स्वच्छ बनाने के लिए पंचायती राज विभाग ने 43 राजस्व गांवों को मॉडल के रूप में विकसित करने की कोशिश शुरू कर दी है। गांवों का चयन कर लिया गया है। इन गांवों में पूरी तरह से स्वच्छ बनाने के बाबत विभिन्न बिंदुओं पर कार्य करने के लिए कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। जल्द ही इस पर काम शुरू किया जाएगा।
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत सभी घरों को शौचालय मुहैया कराने के बाद अब शासन ने दूसरी पहल शुरू कर दी है। योजना के तहत 2024-25 तक जिले के सभी गांवों को पूरी तरह से स्वच्छ बनाने की कोशिश शुरू कर दी है। इसके पहले चरण में स्वच्छ भारत मिशन फेज-2 के तहत जिले के 12 में से दस विकास खंडों के 25 ग्राम पंचायतों के 43 राजस्व गांवों को ओडीएफ प्लस में शामिल करते हुए मॉडल गांव के रूप में विकसित करने के लिए चिह्नित किया गया है। गांवों का चयन करने के बाद पूरी तरह से स्वच्छ व गंदगी मुक्त बनाने के लिए बिंदुवार तैयार कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कार्ययोजना को अंतिम रूप दिए नाने के बाद ग्राम पंचायत स्वच्छता प्लान के तहत पंचायतीराज पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा। गांवों को स्वच्छ बनाने पर होने वाले खर्च का वहन 70 प्रतिशत स्वच्छ भारत मिशन तथा 30 प्रतिशत वित्त आयोग से किया जाएगा। पहले चरण में दो हजार से ज्यादा आबादी वाले गांवों का चयन किया गया है। पहले चरण में स्वच्छ भारत मिशन फेज-2 के तहत जिले के विकास खंडवार इन गांवों को ओडीएफ प्लस में शामिल कर विकसित किया जाएगा। इनमें छानबे विकास खंड के अकोढ़ी, गौरा, गोगांव, खैरा, नर्रोइया तथा हलिया के बंजारीकला, हलिया, नौगांव गांव शामिल हैं। इनके अलावा जमालपुर विकास खंड के भूइलीखास, मिर्जापुर खुर्द तथा कोन में भोगांव, चेकसारी, मुजेहराकला गांव को चयनित किया गया है। इसी तरह से मझवां विकास खंड में बजहां, बरैनी, गड़ौली, गोधना, महामलपुर व मझवां गांव को इस योजना में शामिल किया गया है। सिटी विकास खंड के विजयपुरा तथा पहाड़ी विकास खंड के अकसौली, भरपुरा, रामनगर सिकरी को योजना में शामिल किया गया है। इनके अलावा पटेहरा विकास खंड में पटेहराकला, खोराडीह, सरिया व सीखड़ विकास खंड में केलाबेला व रुदौली सहित 25 ग्राम पंचायतों के कुल 43 गांवों का चयन किया गया है। एसबीएम के जिला समन्वयक विनोद कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि चयनित गांवों में सार्वजनिक स्थानों पर डस्टबिन, कचरा ढोने के लिए ई-रिक्शा अथवा ट्राईसाइकिल के साथ ही कूड़ा संग्रहण एवं पृथक्करण केंद्र बनाए जाएंगे। केंद्र में एकत्रित कचरे से प्लास्टिक को अलग किया जाएगा। गांवों में खाद गड्ढे का निर्माण कराया जाएगा। तरल पदार्थों के लिए सोख्ता पिट का निर्माण कराया जाएगा। गांव के नालियों को एक दूसरे को जोड़ते हुए गंदे पानी को गांव के बाहर निकाला जाएगा। जहां नाली से आने वाले गंदे पानी को शुद्ध कर उसे कृषि योग्य बनाया जाएगा। डीपीआरओ अरविंद कुमार का कहना है कि सभी गांवों को पूरी तरह से स्वच्छ बनाया जाएगा। कार्ययोजना के तहत चयनित गांवों को पूरी तरह से खुले में शौच मुक्त करने, ठोस व गीला कचरा निस्तारण प्रबंधन पर काम किया जाएगा। पॉलीथिन मुक्त गांव प्रबंधन तथा माहवारी प्रबंधन पर कार्य किया जाएगा। ऐसे गांवों में बने सामुदायिक प्रसाधन भवनों पर माहवारी प्रबंधन के तहत इंसीनिरेटर लगाया जाएगा। पहले चरण में 20 फीसदी गांव का चयन किया गया है।
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