मिर्जापुर। जिला प्रशासन ने बाढ़ से राहत के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। हर साल बाढ़ से जूझने वाली 404 ग्राम पंचायतों के लिए 37 बाढ़ चौकियां 15 दिन से सक्रिय हो जाएंगी। जिला प्रशासन ने बाढ़ से पहले और बाद पैदा होने वाली समस्याओं को देखते हुए तैयारियां शुरू कर दी है।
हालांकि वर्ष 2023 में जिले में बाढ़ का प्रभाव नहीं था। गंगा का अधिकतम जलस्तर 73.660 मीटर तक पहुंचा था, जबकि जिले में गंगा के खतरे का निशान 77.724 मीटर और चेतावनी बिंदु 76.724 मीटर है। इसी प्रकार वर्ष 2024 में गंगा का जलस्तर 75.000 मीटर तक पहुंचा था। बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए जिला स्तर पर फ्लड स्टीयरिंग कमेटी का गठन किया जा चुका है। कमेटी के निर्णय के अनुसार जिले में 37 बाढ़ चौकियां खोली गई हैं। जिले की दो तहसीलों, सदर और चुनार के तहत आने वाली 404 ग्राम पंचायतें बाढ़ से प्रभावित होती हैं। इनमें सदर तहसील की 220 और चुनार की 184 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन की तरफ से सदर में 14 और चुनार में 23 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। इन बाढ़ चौकियों पर राहत संबंधी सभी उपाय करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिले में हैं कुल 10 नदियां: अपर जिलाधिकारी एके सिंह ने बताया कि जिले में 10 नदियां हैं। इनमें मुख्य नदी गंगा है। कर्णावती, ओझला, खजुरी सहित अन्य नौ नदियां छोटी हैं। बरसात के समय इनमें पानी बढ़ जाता है जिससे बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ये सभी नदियां गंगा में ही मिलती हैं। इससे गंगा का जलस्तर बढ़ जाता है।
आठ ब्लॉक होते हैं प्रभावित: बाढ़ से जिले की दो तहसीलों सदर और चुनार के दायरे में आने वाले सिटी, कोन, छानबे, मझवां, सीखड़, पहाड़ी, जमालपुर तथा नरायनपुर विकास खंड के गांव प्रभावित होते हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रकाश के लिए टॉवर लगाए जाएंगे।
इसमें से सदर तहसील क्षेत्र में तीन और चुनार में नौ टॉवर लगाए जाएंगे। एडीएम एके सिंह ने कहा कि अभी जिले में बारिश शुरू नहीं हुई है। बाढ़ से निपटने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 15 जून से सभी बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया जाएगा।