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चमका रंगों का बाजार, दूकानों पर उमड़े खरीदार

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दीपावली की रंगों के बाजार में चमक कम
नोटबंदी व जीएसटी के चलते अबकी हो रही कम बिक्री
अमर उजाला ब्यूूरो
मिर्जापुर। दीपावली का त्योहार अब कुछ ही दिन शेष रह गया है। दीपावली पर्व का नाम आते ही रंग रोगन का यत्न शुरू हो जाता है। घर से लेकर दूकानों तक की सफाई की जा रही है। रंगों की दूकानों पर मनचाहा रंग लेने वालो की भीड़ उमड़ी हुई है। रंगों की कंपनियां भी तरह तरह के गिफ्ट व स्कीमें देकर लोगों को लुभाने में जुटी हुई हैं। हालांकि दूकानदारों की माने तो पिछले वर्ष की तुलना मेें इस वर्ष खरीदारों की कमी है।
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दीपावली के अवसर पर रंगों की विभिन्न कंपनियां उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए टीवी के माध्यम से प्रचार प्रसार कर घरों तक पहुंचने का प्रयास करती हैं। घर की महिलाएं भी प्रचार देख कर वही रंग लाने का दबाव बनाती हैं। पेहटी का चौराहा स्थित दूकादार उमेश चंद्र कहते हैैं कि दीपावली आने पर ग्राहकों की संख्या बढ़ जाती है। नेरोलैक, बर्जर, शालीमार आदि कंपनियों ने आफर निकाला है। त्योहार के अवसर पर वाटर पेंट, एनामिल, डिस्टेंपर, इमल्सन, पुट्टी, बार्निश, प्राइमर आदि की मांग बढ़ गई है। डंकीनगंज स्थित शशिकांत बरनवाल ने बताया कि बाजार जरूर गुलजार हैं, लेकिन पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार लोगों में उत्साह कम देखने को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि कहीं न कहीं नोटबंदी व जीएसटी का प्रभाव पड़ रहा है। आम आदमी सभी खर्चों को पूरा करने के बाद ही दूसरा कार्य कर शौक पूरा कर पाता है। उन्होंने बताया कि जीएसटी लगने से रंगों के कीमतों में कोई विशेष फर्क नहीं पड़ा है। दूकानदारों के अनुसार पहले साढ़े 14 प्रतिशत वैट व 12 प्रतिशत इक्साइज टैक्स देना पड़ता था, अब 28 प्रतिशत जीएसटी देना पड़ रहा है। उसके अनुसार एक से डेढ़ प्रतिशत का अंतर आया है।
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