गंगा की फुंफकार से तटवर्ती गांवों के लोग सहमे हुए हैं। जलस्तर शुक्रवार को सुबह खतरे के निशान से महज दो मीटर नीचे था जबकि गंगा में लगभग चार सेंटीमीटर प्रतिघंटे की दर से बढ़ाव जारी था। तेजी से बढ़ रहे जलस्तर के चलते 300 गांवाें पर अब बाढ़ का खतरा मड़राने लगा है। इसको देखते हुए प्रशासन ने बाढ़ चौकियों को चौकस कर दिया है। बाढ़ की ऐसी ही रफ्तार रही तो शनिवार तक तमाम खेतों और गांवों के जलमग्न होने की आशंका है।
बढ़ते जलस्तर के कारण गंगा के तटतीय छानबे, कोन, मझवां, सीखड़, नरायनपुर तथा जमालपुर आदि इलाके के लोगों को रात में नींद नहीं आ रही है। भय है कि कही रात में तो पानी नहीं बढ़ जाएगा। विभागीय अधिकारी भी लगातार बढ़ते जलस्तर पर निगाह बनाए हुए है। 24 घंट के अंदर 98 सेंटीमीटर गंगा का जलस्तर बढ़ा है।
शुक्रवार की सुबह आठ बजे 75.230 मीटर जलस्तर रिकार्ड किया गया जबकि खतरे का निशान 77.724 है । दर्ज किए गए रिकार्ड के अनुसार लगभग दो मीटर गंगा खतरे के निशान से नीचे बह रही है। बता दें कि पिछली बार आए बाढ़ के दौरान जिले के लगभग 300 गांव प्रभावित हुए थे। अधिकांश गांव के लोग अपने अपने परिवार व मवेशी लेकर दूसरे स्थानों पर जाना पड़ा था। इस दौरान छह से अधिक लोगाें की डूबने से मौत भी हुुई थी।