जमालपुर (मिर्जापुर)। क्षेत्र के खिरौडी गांव के हनुमान मंदिर प्रांगण में आयोजित नौ दिवसीय संगीतमय रामकथा के पांचवें दिन कथा का श्रवण करने भक्तों का तांता लगा रहा। कथावाचक ने श्रीराम व सीता के विवाह की कथा का रसपान कराकर श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। पुत्र तो एक कुल का उद्धार करता है, लेकिन पुत्रियां दो कुलों का उद्धार करती हैं।
संतीगतमय श्रीराम कथा में कथावाचक ने संत नीरजानंद शास्त्री जी ने कहा बिना अगुआ के कोई विवाह संपन्न नहीं होता। उन्होंने कहा कि वहीं विवाह सफल होता है जिस विवाह में अगुआ रहते हैं। रामचरित मानस मे चार विवाह हुए हैं- राम और सीता का विवाह जिसके अगुआ विश्वामित्र ऋषि थे। शिव और पार्वती का हुआ, जिसके अगुआ नारद थे और दोनों विवाह सफल हुए। कहा कि तीसरा विवाह नारद ऋषि का एवं चौथा विवाह सूर्पणखा का, लेकिन बिना अगुआ के विवाह सफल नहीं हो पाया। कहा कि कहने का तात्पर्य यह है कि जिस विवाह से जगत का कल्याण होता है, वहीं विवाह सफल होता है। प्रभु श्रीरामचंद्र जी और माता सीता का विवाह जगत कल्याण के लिए हुआ था। श्रीराम और सीता के विवाह के लिए जनकपुरी में उत्सव का माहौल है। चारों दिशाओं में खुशियों की बयार बह रही है। चारों दिशाओं में राजाओं को आमंत्रण पत्र भेजा जा रहा है। अयोध्यावासी भी बाराती बनकर जनकपुरी पहुंच गए हैं और वहां श्रीराम और सीता का विवाह हो रहा है। सीता की विदाई के समय सीता की मां सुनैना से कहती है कि बेटी जो परिवार को साथ लेकर चलता है वह हमेशा प्रसन्न रहता है। कथा वाचक कहा कि बेटी के बिना घर सूना होता है। इस दौरान आयोजक ज्ञान सिंह, चंद्रशेखर पांडेय, अवधेश पांडेय, संजय सिंह, डा. सुरेंद्र सिंह, सुरेश तिवारी, गीता शुक्ला, सारनाथ तिवारी, डब्लू तिवारी, बाघे तिवारी, श्याम सिंह, अशोक दीक्षित, जगदीश राय आदि रहे।