गंगाघाट पर स्थित पांडेय बेचन शर्मा ऽउग्रऽ पुस्तकालय में सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर मंगलवार की रात चुनार साहित्य परिषद के तत्वावधान में राष्ट्रीय एकता अखंडता पर आधारित कवि गोष्ठी आयोजित हुई। मुख्य अतिथि पालिकाध्यक्ष मंसूर अहमद ने मां सरस्वती, पांडेय बेचन शर्मा ऽउग्रऽ एवं मास्टर चुनारी लाल के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया किया।
काव्य गोष्ठी का शुभारंभ आदित्य पदयात्री ने वाणी वंदना से किया। इसके पश्चात राकेश राही ने अपना भारत देश महान कितनी माताओं ने अपने बच्चों को किया इसपे कुर्बान व करूणापति त्रिपाठी ने क्या होगा उस चमन का जिसका मालिक आग है क्या बचा पाएंगे इज्जत जिनके दामन में दाग है एवं जयप्रकाश जय ने जिनकी गाथा स्वर्ण अक्षरों में सिमट नही सकती, बलिदान बिना परतंत्रता हट नही सकती सुनाया। कमलेश्वर कमल ने प्रभु दो राष्ट्र की भक्ति हमें अभिमान मत देना, हो जिसमें स्वार्थ का टपकन वह सम्मान मत देना व अनवर अली अनवर ने गौरव चमन का हो गए वो शान हो गए, जो भी वतन की राह पर कुर्बान हो गए सुनाया। साथ ही राजेश मिश्र ज्योति ने चरण कमल में शीश झुकाता, आफताब आलम ने कोई खतरा नही वतन को बाहरी मुल्क वालों से, खतरा है तो केवल अपने देश के गद्दारों से सुना कर श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। इसके अलावा अशोक सिंह कुशवाहा, डीके अजूबा, राजेंद्र मिश्र, अखिलेश मानव ने भी अपनी रचनाओं को सुना कर मंच को ऊंचाई प्रदान किया। कार्यक्रम आयोजक चुनार साहित्य परिषद द्वारा मुख्य अतिथि पालिकाध्यक्ष मंसूर अहमद व वार्ड के सभासद राजेश कुमार राजू को अंगवस्त्रम, स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस दौरान नगर के परशुराम वर्मा, नंदकिशोर तिवारी, वीके जौहरी, हरिशंकर चौबे, मस्तराम पांडेय, वी प्रसाद आदि मौजूद रहे। संचालन वरिष्ठ साहित्यकार कमलेश्वर प्रसाद कमल ने किया।