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धर्म से ही मनुष्य भवसागर से होगा पार

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पड़री। ना कोई धर्म बड़ा और ना कोई धर्म छोटा है। प्रत्येक नाव का काम है नदी पार कराना। उसी प्रकार प्रत्येक धर्म का काम मनुष्य को भव सागर से पार लगाना। उक्त बातें ढाढ़ीराम रोड स्थित जरहा गांव में जयदेव गुरु आश्रम में सोमवार को विख्यात संत बाबा जय गुरुदेव के परम शिष्य पंकज जी महराज ने भक्तों से कहा।
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उन्होंने कहा कि ईश्वर की सत्ता एक है उसके नाम अनेक है। कोई उसे मंदिर में ढूढता है तो कोई उसे मस्जिम और गुरुद्वारों में। जबकि ईश्वर बाहर नही हमारे शरीर रुपी घर में रहते हैं। पंचभूत रुपी इस शरीर में नौ दरवाजे हैं, जिससे ईश्वर को खोजा जा सकता है। मनुष्य ईश्वर की खोज जंगल व पर्वतों में करने जाता है, जबकि वह रास्ता तो संत व महात्माओं के पास है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कलयुग चल रहा है। कलयुग में भी भगवान मिल सकते है। बस अपने अंदर खोजना होगा। उन्होंने लोगों को मानवता का पाठ पढ़ाया। कहा कि मनुष्य मानवतावादी बने, एक दूूसरे की नि:स्वार्थ भाव से सेवा करें। मनुष्य की सेवा ही ईश्वर की सेवा है। बाबा ने शाकाहार का भी महत्व बताया। कहा कि निर्जीव जीवों की हत्या बंद होनी चाहिए और मनुष्य शाकाहारी बने। उन्होंने कहा कि जय गुरुदेव का नाम लेने से ही सबको शांति मिलेगी और सबका कल्याण होगा। महात्मा सबकी भलाई के लिए कार्य करते है। उन्होंने कहा कि वेषभूष से कोई महात्मा नहीं होता है वरन अपने अंदर जीवात्मा जगाने वाला व्यक्ति महात्मा होता है। उन्होंने कहा कि महात्मा किसी जाति, धर्म के नही वरन सभी के होते है। महात्मा त्रिकालदर्शी होते हैं। इस दौरान डा. रामकृष्ण यादव, मृत्युंजय झा, रोहिताकुमार, सतीश शुक्ला, राजेश यादव, भानु प्रताप, हीरालाल, राम विलास यादव, सरयु प्रसाद आदि मौजूद रहे।
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