मिर्जापुर। पशु आश्रय स्थलों में रखे गए पशु आश्रय स्थलों का हाल बेहाल है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पशुओं को चारा नहीं दिया जा रहा है। भूसा की जगह पुआल का प्रयोग किया जा रहा है। ऐसे में कई पशुओं की मौत भी होने की बात कही जा रही है।
जिले में अस्थायी रूप से एक दर्जन पशु आश्रय स्थलों की व्यवस्था की गई है। इन जगहों पर घूम रहे छुट्टा पशुओं को पकड़कर रखने की व्यवस्था की गई है। नगर में भी दो पशु आश्रय स्थल बनवाए गए हैं। एक एएसजे इंटर कालेज के सामने कांजीहाउस में तथा दूसरा गैबी घाट में। इन दोनों ही जगहों पर रखे गए पशुओं का हाल बेहाल है। आसपास के लोगों का आरोप है कि पशुओं को जब कोई छुड़ाने जाता है तो उससे 70 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से खुराक चार्ज लिया जाता है। जबकि पशुओं को पुआल खिलाया जा रहा है। इससे कई पशुओं के जीवन पर संकट आ गया है। नागरिकों का तो यहां तक आरोप है कि पुआल के चलते ही कई पशुओं की मौत हो चुकी है। अब भी इसी तरह से काम चलाया जा रहा है। जिला प्रशासन की ओर से इसके लिए बजट जारी करने की बात कही जा रही है। मौके पर एकाध कर्मचारी ही दिखाई दे रहे हैं।
जारी कर दिया गया है बजट
इन पशु आश्रय स्थलों के लिए जिला प्रशासन की ओर से 16 लाख 34 हजार चार सौ रुपये का बजट जारी कर दिया गया है। आठ पशु आश्रय स्थलों के लिए बजट जारी किया गया है। इसमें से नगर क्षेत्र के पशु आश्रय स्थल के लिए चार लाख 51 हजार आठ सौ रुपये का बजट जारी किया गया है।
पशु आश्रय स्थलों की देखभाल अच्छी तरह से की जा रही है। नागरिकों की सहायता से उनको चारा, भूसा व हरी सब्जियां भी दी जा रही हैं। कोई परेशानी नहीं है। - रामजी उपाध्याय, प्रभारी ईओ, नगर पालिका परिषद मिर्जापुर
नपाध्यक्ष, डीएम और अन्य ने किया था निरीक्षण
मिर्जापुर। लगातार आ रही इन्हीं शिकायतों के चलते बुधवार को नगर पालिकाध्यक्ष मनोज जायसवाल, जिलाधिकारी और अन्य ने पशु आश्रय स्थलों का निरीक्षण किया था। आवश्यक कार्रवाई के लिए कई निर्देश भी दिए गए थे।