मिर्जापुर। नबी फरमाते हैं कि अल्लाह पाक ने रोजे आशूरा यानि दसवीं मुहर्रम को हजरत आदम को तमाम मखलूकात पर बरगुजीदा किया। हजरत इद्रीस को आसमान पर उठाया, हजरत नूर को जूदी पहाड़ पर ठहराया, हजरत इब्राहिम को अपना खलील दोस्त बनाया और उन पर नार नमरुद को गुलजार किया, दाऊद की खता माफ की, हजरत अय्यूब से बला को दफा किया।
यह बातें शहर इमाम मौलाना हाफिज निसार अहमद ने कही। उन्होंने बताया कि इस्लामी साल का पहला महीना मुहर्रम शरीफ है। अल्लाह के नबी पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब ने इस महीने की बड़ी फजीलत बयान फरमाई है। नबी फरमाते हैं कि मुहर्रम की दसवीं तारीख आशूरा का दिन बारगाहे इलाही में मकबूल दिनों में एक दिन है। इसी माह की दशवीं तारीख को पैगम्बर हजरत मोहम्मद मुस्तफा के नवासे हजरत अली के नूरे-नजर हजरत फातमा के लख्ते-जिगर हजरत इमाम हुसैन रजिअल्लाह अन्ह ने जामे शहादत नोश फरमाया। पूरी दुनियां में इमामे हुसैन का जिक्र मनाया जाता है। हजरत इमाम हुसैन ने जुल्म के खिलाफ आवाज उठाई। जालिम यजीद हक की आवाज को दबाना चाहता था, इमाम हुसैन ने फरमाया इस धरती पर अभी नबी का नवासा मौजूद है। कुरआन पर, शरीअत पर व दीन पर आंच नहीं आने दूंगा। यहां तक कि यजीद का जुल्म बढ़ता गया और ताकत की बुनियाद पर इमाम का सिर भी जिस्म से जुदा करवा दिया। मगर इमाम ने जालिम के नापाक इरादों और हरकतों को मलियामेट कर दिया। इमाम हुसैन फरमाते हैं जमीन खुदा ए पाक की है, इस पर अम्न और अमान पैदा करो, किसी पर जुल्म न करो।