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नहर पाट कर लिया रहन सहन

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जिगना। जहां एक तरफ सरकार किसानों की आय को दुगना करने की बात कर रही है वहीं नहर होने के बाद भी किसान सिंचाई के पानी के लिए तरस रहे हैं। छानबे क्षेत्र में नहर में पानी न आने के कारण लोगों ने नहर को पाट कर उसपर कब्जा कर लिया है। कई लोगों ने नहर की जमीन दुकान और मकान बनवा लिया है। कई स्थानों पर नहर का अस्तित्व खत्म हो गया है।
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मालूम हो कि वर्तमान समय में लघु डाल नहर प्रखंड द्वारा संचालित हरगढ़ पंप कैनाल की जरैला, चकिया, मनिकठी नहर को जरैला, पंडितपुर, नयेपुर, मनिकठा, भिटरिया में तथा नरैना से काशीसरपती के लिए निकली माइनर का निशान ही है। हरगढ़ द्वितीय से निकली मिश्रपुर नहर, खैरा, बसेवरा, मिश्रपुर में पटी पडी़ है। इसी तरह नरायनघाट पंप कैनाल से निकली नीबी गहरवार नहर व मनिकठा नहर बन्हैता व मनिकठा खाम्हनपुर में तथा उमापुर लिप्ट कैनाल की मांडा राजवाहा, सिकराकला से गोड़सर तक पाट कर सड़क बना दी गई है। किसानों द्वारा कई बार नहरों की खुदाई अथवा मरम्मत कराने व टेल तक पानी पहुंचाने की मांग की गई। किसानों की मांग पर आज तक अधिकारियों द्वारा किसानों के इस पीड़ा पर गौर नहीं किया गया, और न ही टेल तक पानी पहुंचा सका। अतिक्रमणकर्ताओं का कहना है कि मकान व रहन सहन के सामने फालतू पड़ा नहर किस काम का है उसका उपयोग किया जा रहा है। जब नहर विभाग आएगा तो छोड़ दिया जायेगा।
लघु डाल नहर प्रखंड के एसडीओ टीएन मिश्र ने कहा कि आज ही नहर पटने की जानकारी हुई है। जेई को हरगढ़ की नहरों पर किसान की शिकायत पर जांच के लिए भेजा गया है। जांच रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की जाएगी।
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