मिर्जापुर। तीन तलाक पर मंगलवार को दिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले का मुस्लिम समाज ने आमतौर पर स्वागत किया है। उनका कहना है कि लगातार तीन तलाक शरीयत के मुताबिक भी जायज नहीं है। इससे महिलाओं में हमेशा भय बना रहता है। महिलाओं ने कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है। कहा कि तीन तलाक के कानून में बदलाव से तमाम घर टूटने से बच जाएंगे। हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि तीन तलाक घरेलू अनुशासन के लिए जरूरी है। उसका तरीका कुछ भी हो।
मदरसा अरबिया के प्रधानाचार्य नजम अली का कहना है कि शरीयत में एक बार में तीन तलाक को नापसंद बताया गया है। शरीयत में तलाक के तीन तरीके बताए गए हैं। तलाके विदअत को सबसे गलत तरीका बताया गया है, जिसमें अंतर्गत एक बार में तीन तलाक बोला जाता है। उन्होंने कहा कि शरीयत की नजर में ऐसा करने वाला बहुत बड़ा मुजरिम है। एक बार में तीन तलाक देने वालों के खिलाफ सख्त कानून बनाने की जरूरत है ताकि इसका दुरुपयोग रुके। वासलीगंज की महजबीन अफरोज ने कहा कि तीन तलाक के मुद्दे को लोगों ने मजाक बनाकर रख दिया है। लोग अपने फायदे के हिसाब से इसका इस्तेमाल करते हैं। तीन तलाक को अल्लाह ने बनाया है। तीन तलाक को लेकर अभी तक जो मजाक बना था, उस पर इस फैसले से लगाम लगेगा।
रामबाग की शबाना बेगम ने कहा कि तीन तलाक पर कोर्ट ने जो फैसला किया है उससे मुस्लिम महिलाओं का निश्चित रूप से भला होना है। तीन तलाक पर रोक से पति पत्नी एक साथ रह सकेंगी। इसके साथ ही एक कड़ा कानून बनाने की आवश्यकता है, जिससे की इसका दुरुपयोग करने वालों पर लगाम लग सके।
संकट मोचन निवासिनी रेहाना बेगम ने कहा कि शरीयत में भी एक बार में तीन तलाक को गलत बताया गया है। उन्होंने कहा कि कोर्ट के फैसले के बाद अगर संसद में कोई ऐसा कानून बनाया जाता है, जिससे इसका दुरुपयोग रोका जा सके तो बेहतर होगा। इससे महिलाओं का भला होगा। चितावनपुर निवासी इमरान खान का कहना है कि मौलवी, मौलाना, मदरसा संचालक और तमाम दीन के ओहदेदारान से गुजारिश है कि इस्लाम में तीन तलाक का जो सही तरीका है उसका प्रचार करें। कम पढ़े-लिखे लोगों को तक सही जानकारी पहुंचाएं। कम जानकारी होने की वजह से ही लोग एक बार में बिना सोचे तीन तलाक बोल कर रिश्ता तोड़ लेते हैं।