मिर्जापुर। नगर की सड़कों पर वाहनों से हादसे से अधिक लोगों को छुट्टा पशुओं का भय सताता है। मुख्य सड़कों, चौराहों से लेकर गलियों तक में जहां तहां बैठे और विचरण करते छुट्टा जानवर कभी भी किसी के ऊपर हमला कर देते हैं जिससे लोग घायल होते रहते हैं। दोपहिया चालक इन जानवरों से बचने के प्रयास में भी दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। इतना ही नहीं छुट्टा जानवरों के चलते हर रोज जाम लग जाता है। जानवरों के चलते एक वाहन रुका तो पीछे वाहनों की कतार लग जाती है।
सड़कों और चौराहों पर जहां तहां धूमने वाले छुट्टा जानवर कब आपस में भिड़ जाएंगे, कुछ कहा नहीं जा सकता। अक्सर होता है कि व्यस्त सड़क पर जानवरों के भिड़े से अपरातफरी मच जाती है और एक वाहन दूसरे से टकरा जाता है। ऐसी स्थिति सबसे अधिक दोपहिया वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त होते हैं। खुद बचने के चक्कर में या तो गिर जाते हैं या अनियंत्रित होकर दूसरे वाहन से भिड़ जाते हैं जिससे दोनों दो पहिया वाहनों पर सवार लोग घायल हो जाते हैं। स्कूल खुलने और छुट्टी होने के समय सुबह और दोपहर में पैदल, साइकिल या स्कूटी से स्कूल कालेज छात्रों के दुर्घटनाग्रस्त होने का भय अधिक बना रहता है। नगर के वासलीगंज, घंटाघर, मुकेरी बाजार, गुड़हट्टी बाजार, गणेशगंज, संगमोहाल, इमामबाड़ा, रोडवेज, स्टेशन रोड, रमईपट्टी, संकटमोचन मार्ग, तेलियागंज, सबरी, त्रिमोहानी, लालडिग्गी आदि बाजारों में सड़कों पर एक नहीं छह से आठ छुट्टा जानवर हमेशा घूमते या बीच सड़क पर बैठे नजर आते हैं। छुट्टा जानवर ठेला, खोमचा वालों के सामान को नष्ट कर देते हैं। सब्जी की दुकानों पर सब्जियां झपट लेते हैं। अगर दुकान दार ने जानवरों को खदेड़ा तो भाग रहे जानवरों से टकरा कर लोग गिर जाते हैं। छुट्टा जानवरों का भय लोगों में इस कदर है कि बाजार जा रही महिलाएं जानवरों को देख या तो रास्ता बदल देती है या जानवरों के हटने तक रुक कर प्रतीक्षा करती हैं। अभिभावक स्कूल जाने वाले बच्चों को भी छुट्टा जानवरों से बच कर जाने की सलाह देते हैं। इन जानवरों के हमले से कई लोग घायल हो चुके हैं। इसके बाद भी नगर पालिका प्रशासन की ओर से छुट्टा जानवरों की धरपकड़ या उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
जानवरों हमले से कई लोग हो चुके हैं घायल : मिर्जापुर। शहर की सड़कों पर छुट्टा जानवरों के हमले से कई लोग घायल हो चुके हैं। इनमें कुछ ऐसे लोग भी हैं जो अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले थे और उपचाराधीन होने के कारण काम नहीं कर पा रहे हैं जिससे परिवार की आर्थिक दशा खराब हो गई है
छुट्टा जानवर के हमले से बुंदेलखंडी मोहल्ला निवासी मुन्नीलाल के हाथ की हड्डी टूट चुकी है। वह कई माह से घर पर हैं। काम छूट जाने के कारण परिवार के सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया है। वासलीगंज निवासी एवं पशु चिकित्साधिकारी कार्यालय के कर्मचारी कवल कुंज चौबे की पुत्री पद्मजा चौबे भी कुछ महीने स्कूल से घर आते समय इन छुट्टा जानवर के हमले से घायल हो गई थी। उसकी साइकिल भी क्षतिग्रस्त हो गई थी। पेहटी का चौराहा मोहल्ला निवासी गोपाल कुमार भी पेटही के चौराहे पर लड़ रहे छुट्टा पशुओं की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनका महीनों जिला चिकित्सालय में उपचार चला था। बाजार जाते समय हन्ना की गली निवासी गुलाब कसेरा के ऊपर सांड़ ने हमला कर दिया था जिससे वह घायल हो गए थे। इनका लंबे समय तक इलाज चला था।
वर्जन
पशुओं को कहीं रखने की कोई व्यवस्था नहीं है। पहले छुट्टा जानवरों को पकड़ कर जंगलों में छोड़ दिया जाता था लेकिन इस पर पाबंदी लगा दी गई है जिससे ऐसे जानवर पकड़े नहीं जा रहे हैं। छुट्टा पशुओं की रखने की जैसे ही कहीं व्यवस्था होगी वहां छुट्टा जानवरों को भेजवा दिया जाएगा।- विनय तिवारी, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद