मिर्जापुर। अपर सत्र विशेष न्यायाधीश एससी एसटी कोर्ट भगवती प्रसाद सक्सेना ने मारपीट करने में आरोपी महिला अधिवक्ता की जमानत अर्जी को बुधवार को सुनवाई के दौरान निरस्त कर दिया। न्यायालय ने कहा कि अपराध की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए अभियुक्त की जमानत का आधार पर्याप्त नहीं है। इसलिए जमानत का प्रार्थना पत्र निरस्त किया जाता है।
13 सितंबर 2018 को न्यायालय परिसर में साढ़े 11 बजे दिन वादी अधिवक्ता संचमलाल गुप्ता की चौकी पर जबरन बैठने के विवाद को लेकर महिला अधिवक्ता पूनम सिंह ने अपने एक साथी के साथ संचम लाल से मारपीट की थी। आरोप है कि चाबी के गुच्छे में लगे चाकू से वार कर उनको घायल करते हुए पांच हजार रुपया भी लूट लिया था। जिस पर पूरे कचहरी परिसर में घटना वाले दिन काफी गहमा गहमी थी। पुलिस ने संचम लाल की तहरीर पर महिला अधिवक्ता के खिलाफ धारा 324, 394,427,506 भादसं के आरोप में मुकदमा पंजीकृत कर उसे गिरफ्तार जेल भेज दिया था। जिला जेल से महिला अधिवक्ता पूनम ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में जमानत अर्जी दी थी। जिसकी सुनवाई न्यायालय ने की। अभियोजन की तरफ से सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी विवेक सिंह ने जमानत का कड़ा विरोध किया। अधिवक्ता की दलील के आधार पर न्यायालय ने अपराध की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए आरोपी अधिवक्ता की जमानत अर्जी को निरस्त कर दिया।