जमालपुर। स्थानीय ब्लाक के प्रमुख पद नौ मार्च को होने वाले उपचुनाव के लिए दावेदारी करने वाले अमित कुमार की ओर से लगाए गए अनुसूचित जाति के प्रमाणपत्र को जिलाधिकारी विमल कुमार दुबे ने निरस्त कर दिया। जांच में जालसाजी कर प्रमाणपत्र बनवाने की पुष्टि होने पर यह कार्रवाई की गई। इसकी जानकारी होने पर अमित कुमार के समर्थकों में हड़कंप मचा है।
जमालपुर के प्रमुख रहे संजय सोनकर के खिलाफ जनवरी में अविश्वास प्रस्ताव पास हुआ था। इसके बाद संजय सोनकर ने प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके चलते प्रमुख पद पर उपचुनाव नौ को होना है। सात मार्च को नामांकन होगा और आठ मार्च को नाम वापसी होगी। प्रमुख रहे संजय सोनकर ने अमित कुमार के जाति प्रमाणपत्र पर संदेह जताते हुए जांच की मांग की थी। 23 सितंबर 2015 को तहसीलदार चुनार ने अमित कुमार के नाम चैनपुरा गांव से अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र जारी किया था। उसी प्रमाणपत्र के आधार पर अमित कुमार गुलौरी से क्षेत्र पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ कर जीता था। फिर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित प्रमुख का चुनाव लड़कर मात्र दो मतों से पराजित हुआ था। संजय सोनकर की शिकायत पर जिलाधिकारी विमल कुमार ने एडीएम वित्त एवं राजस्व, उपजिलाधिकारी सदर, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी एवं जिला समाज कल्याण अधिकारी की चार सदस्यीय टीम बनाकर पूरे प्रकरण की जांच कराई थी। टीम ने जिलाधिकारी को जांच रिपोर्ट सौंपी। जांच में पाया गया कि अमित कुमार ने कूटरचित तरीके से जालसाजी कर चैनपुरा गांव के कुटुंब रजिस्टर में गरीब दास एवं सोनी देवी के पुत्र के रूप में अपना नाम दर्ज करा लिया था। अमित कुमार गौरी गांव के प्रभात सिंह एवं मधुबाला देवी के पुत्र हैं। इसी आधार पर जिलाधिकारी ने अमित कुमार के नाम तहसीलदार चुनार की ओर से जारी अनुसूचित जाति के प्रमाणपत्र को निरस्त कर दिया।
उपचुनाव के एक वक्त पहले जाति प्रमाणपत्र निरस्त होने से अमित कुमार का प्रमुख पद चुनाव लड़ना मुश्किल हो गया है। चार फरवरी को अमित कुमार समेत पांच लोगों के विरुद्घ फर्जी तरीके से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवाने के आरोप में मुकदमा भी पंजीकृत कराया गया था।
जिलाधिकारी विमल कुमार दुबे ने बताया कि जांच में पाया गया कि क्षेत्र पंचायत सदस्य अमित कुमार ने फर्जी तरीके से अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवाया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर अमित कुमार का जाति प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिया गया।