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ठंड के कहर ने लीं दो और जानें

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मिर्जापुर रेलवे स्टेशन परिसर में जलाया गया अलाव
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मिर्जापुर। जिले में ठंड का कहर जारी है। शुक्रवार से दिन में धूप दो रही है लेकिन गलन के चलते ठंड में कमी नहीं आ रही है। शुक्रवार को ठंड लगने से तीन लोगों की मौत हुई थी जबकि मड़िहान कस्बे में शुक्रवार देर रात एक हकीम और मझारी में एक किसान की ठंड लगने से मौत हो गई। इस ठंड के मौसम में ठंड लगने से अबतक कुल दस लोगों की जान जा चुकी है।
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मड़िहान कस्बा निवासी हकीमुद्दीन अंसारी (55) पेशे से हकीम थे। गुरुवार की देर रात वे खेत में सिंचाई करने के बाद घर वापस लौटे। ठंड लगने से कुछ ही देर बाद पेट में दर्द होने लगा। परिजन इलाज के लिए कस्बा स्थित एक नर्सिंग होम में ले गए। इलाज के दौरान शुक्रवार की रात ही हकीमुद्दीन की मौत हो गई। क्षेत्र के मझारी गांव में एक किसान की ठंड लगने से मौत हो गई। मझारी निवासी किसान मूलचंद (55) खेत की सिंचाई करने गए थे। दोपहर बाद उसे ठंडी लगने लगी। जानकारी होने पर परिवार के लोग इलाज की व्यवस्था करते तबतक मूलचंद की मौत हो गई। शुक्रवार को विंध्याचल और मड़िहान क्षेत्र में तीन लोगों की मौत हुई थी। विंध्याचल के तिवारीपुरा गांव में राधेश्याम निषाद के छह माह के पुत्र मुन्ना की मौत हुई थी जबकि मड़िहान राहकला गांव में ठंड लगने से जियाना देवी (75) और इसी गांव के विशुन दयाल (70) की ठंड लगने से जान चली गई थी। इसके अलावा विभिन्न गांवों में अन्य चार लोग ठंड के चलते जान गवां चुके हैं।
जिले में कोहरे के चलते गलन भरी ठंड से निजात नहीं मिल पा रही है। शुक्रवार और शनिवार को अधिकतम 23 और न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस रहा। शनिवार को सुबह दस बजे तक घना कोहरा छाया रहा। सर्द हवाएं भी चलीं। इसके चलते दोपहर में धूप तो हुई लेकिन ठंड से राहत नहीं मिली। दस बजे तक कोहरे कारण दृश्यता कम होने से वाहन रेंगते हुए नजर आए। सुबह दस बजे तक घने कोहरने के चलते सड़कों पर वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई। सड़कों पर अपेक्षाकृत कम लोग नजर आए। दुकानें भी सुबह 11 बजे के लगभग खुल रही हैं। शनिवार को दफ्तरों में अवकाश होने के कारण दिन भर कचहरी और कलेक्ट्रेट के इलाकों में सन्नाटा पसरा रहा। दिन में चार घंटे धूप रहीष शाम चार बजे फिर बदली हो गई और शाम होते ही कोहरा छाने लगा। शाम को अंधेरा होते ही ठंड के चलते बाजार फिर से सूने हो जा रहे हैं। ट्रेनों के विलंब होने से रेलवे स्टेशनों पर भी यात्रियों का आवागमन कम ही हो रही है। यही हाल रोडवेज बसों का भी है। रात में तो इन बसों में दो चार यात्री ही सफर कर रहे हैं। जिन लोगों को बहुत जरूरी काम हैँ वे ही बसों ट्रेनों का रुख कर रहे हैं नहीं तो लोग अपने घरों में ही रहने की कोशिश में जुटे हैं।
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