मिर्जापुर। स्वास्थ्य विभाग की समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। करीब 300 एनएचएम कर्मियों के हड़ताल पर जाने के बाद अब मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद डीजीएमई की ओर से सीएचसी-पीएचसी पर तैनात किए गए चिकित्सक भी हड़ताल पर चले गए हैं।
प्रदेशव्यापी हड़ताल के तहत जिले के सीएचसी-पीएचसी पर तैनात 17 चिकित्सकों ने सोमवार को सीएमओ को कार्य बहिष्कार का ज्ञापन सौंपा। इसके बाद वे लखनऊ में आयोजित धरना-प्रदर्शन में शामिल होने चले गए।
चिकित्सकों ने बताया कि मेडिकल कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें दो वर्ष तक सरकारी अस्पताल में काम करना होता है। डायरेक्टर जनरल ऑफ मेडिकल एजुकेशन (डीजीएमई) ने उनकी तैनाती मेडिकल कॉलेज और सीएचसी-पीएचसी में की है। मेडिकल कॉलेज में कार्यरत चिकित्सकों को हर माह एक लाख 19 हजार रुपये मानदेय मिलता है, जबकि सीएचसी-पीएचसी में तैनात चिकित्सकों को अलग-अलग स्थानों पर कहीं 70 हजार तो कहीं 50 हजार रुपये मिल रहे हैं। चिकित्सकों की मांग है कि समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जाए।
चिकित्सकों ने मांग की कि वेतन या भत्तों में स्वीकृत संशोधन के फलस्वरूप देय बकाया धनराशि का नियमानुसार भुगतान संबंधित प्रभावी तिथि से किया जाए।
चिकित्सकों ने बताया कि उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने पूर्व में इस संबंध में आदेश जारी करने का आश्वासन दिया था, लेकिन उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हुई। इन्हीं मांगों को लेकर प्रदेश के 1,400 चिकित्सक हड़ताल पर हैं। इनमें मिर्जापुर जिले के 17 चिकित्सक शामिल हैं। विरोध प्रदर्शन में डॉ. अर्पन सिंह, डॉ. अनुज पटेल, डॉ. आशुतोष, डॉ. निशा, डॉ. अखिलेश्वर, डॉ. अनुज मिश्रा और डॉ. अवंतिका आदि शामिल रहे।
300 से अधिक एनएचएम कर्मी भी हड़ताल पर: मिर्जापुर। जिले के 300 से अधिक एनएचएम कर्मचारी लखनऊ में हड़ताल में शामिल होने चले गए हैं। शनिवार तक कुछ कर्मचारी जिले में रुके थे, लेकिन अब अधिकांश कर्मचारी धरने में शामिल होने चले गए हैं। इनमें चिकित्सक, मैनेजर, लैब टेक्नीशियन, स्टाफ नर्स और एएनएम शामिल हैं।