हलिया (मिर्जापुर)। बेलन बरौधा स्थित श्रीराम जानकी मंदिर परिसर में चल रहे श्रीराम कथा के अंतिम दिन कथा श्रवण करने को बड़ी संख्या में भक्त पहुंचे। कथावाचक बाल संत श्याम सुंदर दास महाराज ने मानव जीवन के महत्व पर प्रकाश डाला। कथा के बीच-बीच में मधुर भजनों की प्रस्तुतियों से श्रद्घालुु मंत्रमुग्ध हो उठे। वहीं, कथा के बाद सभी के बीच प्रसाद वितरित किया गया। बाल संत ने कहा सभी को अपनी आध्यात्मिक संस्कृति व सभ्यता को अक्षुण्ण रखने के लिए श्रीराम के जीवन आदर्श को अपनाना चाहिए।
श्रीराम कथा के अंतिम दिन बाल संत ने कहा मनुष्य को निजी कार्यों के साथ-साथ परम श्रद्धेय ईश्वरीय सत्ता के लिए भी अपने कर्तव्य का बोध होना चाहिए। हर मानव को समझना चाहिए ईश्वर ने हमें मानव जीवन क्यों प्रदान किया है। कहा कि हम अपने तथा अपने परिवार की सुख-सुविधा के लिए ही यह अत्यंत दुर्लभ परंतु नश्वर जीवन व्यतीत कर देते हैं। इसके लिए लोग हर तरह के छल-कपट व अनैतिक कार्य करने को आतुर रहते हैं। कहा कि कुसंगति व ज्ञान के अभाव में मनुष्य सामाजिक दायित्व एवं ईश्वर के प्रति निर्धारित जिम्मेदारियों को भूलता जा रहा है। आध्यात्मिक शक्ति सहित उच्च मानवीय संस्कारों के बल पर ही हमारा देश विश्व गुरु की उपाधि से विभूषित था। बहादुर सैनिक दिन रात सर्दी, गर्मी व बरसात की चिंता किए बगैर देश की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर देते हैं। उनकी राष्ट्र भक्ति पर सबको गर्व और उनके प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए। संचालन यज्ञाचार्य प्रभाकर मिश्र ने किया। कथा के दौरान हारमोनियम पर गायन पवन दूबे, तबला पर श्रीश पांडेय, आर्गन पर सुशील व मजीरा पर बाला ने संगत किया। इस दौरान रमाकांत तिवारी, सिद्धनथाथ पांडेय, अश्विनी मिश्र, विजय शंकर मिश्र, दीपचंद सोनी, जितेंद्र मिश्र, प्रेम सिंह, ज्योति मिश्र आदि रहे।