मिर्जापुर। ईंट भट्ठों को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में कार्य हो रहा है। अब जिगजैग भट्ठे लग रहे हैं, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम हो रहा है और चिमनी से बिल्कुल कम काला धुआं निकलता है। इसका प्रचलन वाराणसी से शुरू हुआ। इसका अनुसरण पड़ोसी देश भी करने लगे हैं। ईंट भट्ठों में ऊर्जा की बचत विषय पर गोष्ठी वाराणसी के होटल क्लार्क में 29 सितंबर को सुबह 10 बजे से होगी। ये बातें उत्तर प्रदेश ईंट निर्माता समिति के पूर्व अध्यक्ष व अखिल भारतीय ईंट निर्माता संघ नई दिल्ली के पूर्व उपाध्यक्ष कमलाकांत पांडेय ने भरुहना स्थित एक रेस्टोरेंट में पत्रकारों से बातचीत में कहीं।
उन्होंने कहा कि ईंट भट्ठों को सही कोयला नहीं मिलता, जिससे वह ठीक से जल नहीं पाता, जिससे प्रदूषण में बढ़ोतरी होती है। इसलिए कम से कम छह हजार कैलोरिफिक वैल्यू का कोयला भट्ठों को मिलना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अभी तक भट्ठा मालिक खुले बाजार से अधिक मूल्य पर कोयला प्राप्त करते हैं। बताया कि ईंट भट्ठों में प्रदूषण न हो इसके लिए युद्घस्तर पर प्रयास हो रहा है तथा इसमें भारी सफलता भी मिली है। उन्होंने बताया कि अब जिगजैग भट्ठे लग रहे हैं, जिससे कार्बन उत्सर्जन कम है व चिमनी से भयंकर काला धुआं निकलने वाला बिल्कुल कम हो गया है। इसका प्रचलन वाराणसी से प्रारंभ हुआ तथा इस समय देश ही नहीं बल्कि पड़ोसी देश भी इसका अनुसरण करने लगे हैं। पूर्व अध्यक्ष श्री पांडेय ने बताया कि वाराणसी के होटल क्लार्क में 29 सितंबर को सुबह 10 बजे से ईंट भटठों में ऊर्जा की बचत विषय पर गोष्ठी होगी। ईंट निर्माता परिषद वाराणसी व यूपी नेडा यूपी सरकार के संयुक्त प्रयास से आयोजित गोष्ठी में राष्ट्रीय विशेषज्ञ, इंजीनियर, वैज्ञानिक तथा जागरूक भट्ठा मालिक भाग लेंगे। इस गोष्ठी में ऊर्जा की बचत पर चिंतन होगा।