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प्रशासन संवरेगा पक्का घाट की सूरत

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मिर्जापुर। जिले की प्रशासनिक मशीनरी ने सांस्कृतिक धरोहरों को संवारने और सुरक्षित रखने के लिए प्रयास शुरू कर दिया है।पहले नगर के नक्काशीदार पक्का घाट और घंटाघर की इमारत को संरक्षित करने की पहल की गई है। इसके लिए निगरानी समिति का गठन किया गया है।निगरानी समिति यहां श्रमदान कर के भवनों की सुंदरता बढ़ाने का प्रयास करेगी। जिलाधिकारी ने अपनी टीम के साथ मंगलवार को पक्काघाट का मुआयना किया।
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नगर के बीचोबीच स्थित पक्काघाट की सुंदरता देखते ही बनती है लेकिन रख रखाव के अभाव में यहां की नक्काशीदार इमारतें अपना अस्तित्व खोती जा रही हैं। इस महत्वपूूर्ण घाट को आसपास के लोगों ने अतिक्रमण का शिकार बना दिया है। इन समस्याओं को देखते हुए इस प्राचीन धरोहर को बचाने का कार्य जिला प्रशासन ने निगरानी समिति को सौंप दिया है। जिलाधिकारी ने मंगलवार की सुबह पक्काघाट का दौरा किया और समस्याओं से रूबरू हुए। उन्होंने बताया कि घाट पर जमी मिट्टी को साफ करने तथा इमारतों पर उगे घासफूस को हटाने के लिए 28 दिसंबर से श्रमदान आरंभ किया जाएगा। श्रमदान में विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के अलावा स्कूली बच्चों को लगाया जाएगा। सीढ़ियों के नीचे हुए गड्ढों को भर कर उन्हें ठीक किया जाएगा। पक्का घाट को साफ कर इसमें विभिन्न प्रकार की रंगीन लाइटें लगवाये जाने की योजना है। गंगा किनारे एक मंच का निर्माण कराया जाएगा जहां रोजाना कोई न कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसकी शुरूआत एक जनवरी से यहां गंगा आरती से की जाएगी। जिलाधिकारी बिमल कुमार दुबे ने बताया कि इसी तरह घंटाघर की इमारत को भी संरक्षित करने की पहल की जाएगी। घंटाघर के आसपास के बाजारों में लगने वाले जाम से निजात दिलाने के लिए यहां खड़े होने वाले वाहनों की पार्किंग घंटाघर के मैदान में की जाएगी इससे नगरपालिका की आय भी बढ़ेगी और घंटाघर में अराजक तत्वों की आवाजाही पर लगाम लगेगी। उन्होंने बताया कि प्रशासन इन प्राचीन धरोहरों को बचाने के लिए कटिबद्ध है लेकिन आगे इसके रख रखाव की जिम्मेदारी स्थानीय लोगों की होगी। निगरानी समिति में डा. रचना बिमल, विभूति मिश्र, तृप्त चौबे, आकाश दुबे, राजेश मिश्र आदि शामिल हैं।
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