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नगर मजिस्ट्रेट ने जुबिली कालेज के कार्यालय को सीज किया

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मिर्जापुर। नगर मजिस्ट्रेट ने जिलाधिकारी के आदेश पर शनिवार की सुबह नौ बजे एएस जुबिली इंटर पहुंचे और कार्यालय को सीज कर दिया। कार्यालय सीज करने से विद्यालय में प्रवेश, अंक पत्रों के विरतण, टीसी शुल्क आदि की प्रकिया पूरी तरह से ठप हो गई। यहां तक कि शिक्षक कर्मचारी और छात्रों के लिए बिना शौचालय भी कार्रवाई की जद में आ गया। पूछने पर नगर मजिस्ट्रेट ने जहां कार्रवाई के पीछे गंभीर वित्तीय अनियमितता बताया है वहीं प्रधानाचार्य ने इसे सत्ता पक्ष के दबाव में लिया गया निर्णय कहा है।
13 जुलाई गुरुवार को सिटी मजिस्टेट अचानक विद्यालय पहुंचे और उनहोंने वर्ष 2015-16 के आय व्यय की जांच की। उन्होंने शुक्रवार को भी प्रधानाचार्य को अभिलेखों के साथ अपने कार्यालय बुलवाकर देर शाम तक जांच की। साथ ही अभिलेखों को रखवा लिया। इसके बाद उन्होंने प्रधानाचार्य से सत्र 2014-15 के भी अभिलेख जांच हेतु मांगे। किंतु प्रधानाचार्य ने शाम होने का हवाला देते हुए अगले दिन प्रस्तुत करने की वक्त मांगा। इसी बीच शनिवार की सुबह सिटी मजिस्ट्रेट सुरक्षा बलों के साथ विद्यालय पहुंच गए। उन्होंने गंभीर वित्तीय अनियमितता की आशंका जताते हुए समस्त अभिलेखीय कार्यालय को सीज कर दिया।
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प्रिसिंपल के खिलाफ जिलाधिकारी के यहां वित्तीय अनियंमितता की शिकायत की गई थी। डीएम ने मुझे जांच कर रिपोर्ट देने को कहा है। उसी के आधार पर प्रधानाचार्य से कालेज का रिकार्ड मांगा गया था। नहीं मिलने पर उसमें गड़बड़ी करने की आशंका जताते हुए कार्यालय को सील कर दिया गया है। जहां तक बच्चों के पढ़ाई का सवाल है तो जो रिकार्ड मांगा गया है उसे दे दे कार्यालय को खोल दिया जाएगा। देवेंद्र प्रताप मिश्र सिटी मजिस्ट्रेट

एएस जुबिली इंटर कालेज के प्रधानाचार्य निजामुददीचन का आरोप है कि जिला प्रशासन सत्ता के दबाव में काम कर रहा है। एक ऐसे व्यक्ति को जिसे डाइरेक्टर ने बर्खास्त कर दि या है उसे चार्ज देने के लिए फर्जी शिकायतों के आधार पर इस प्रकार की कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि अब तक प्रधानाचार्य के खिलाफ इस तरह की तीन सौ फर्जी शिकायतें व जन सूचनाओं का खेल खेला जा चुका है। जबकि स्पष्ट शासनादेश है कि किसी भी शिकायत के लिए शिकायतकर्ता का शपथ पत्र व परिचय सत्यापन होना चाहिए। किंतु सभी जांच बिना शिकायत कर्ता का सत्यापन कराए ही किए गए। वर्तमान कार्रवाई भी उसी का एक हिस्सा है।
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विवादों के चलते ध्वस्त हुआ शौक्षिक माहौल
विद्यालय प्रचानाचार्य पद को लेकर चार साल से चल रहे विववाद के कारण गुटबाजी और अनुशासनहीनता चरम पर है। रोज रोज की शिकायत, जांच और जनसूचना तथा मुकदमों के कारण पठन पाठन की ओर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है। परिणाम जनपद का प्राचीनम विद्यालय वर्तमान में राजनीतिक अखाड़े के रूप में बदनाम हो चुका है। इस वर्ष की शुरूआत एक बार फिर जांच और कार्रवाई से होने के कारण स्कूल का कार्य प्रभावित हो रहा है।
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