चुनार। राजगढ़ मार्ग पर स्थित दुर्गा खोह मंदिर देवी भक्तों के आस्था का केंद्र बना हुआ है। नवरात्र के पहले दिन शनिवार को यहां भक्तों की भारी भीड़ रही। साथ ही सामान्य दिनों में भी मंदिर पर भक्तों की भारी भीड़ दर्शन पूजन के लिए उमड़ी रहती है। मंदिर पर दूर दराज के क्षेत्रों सहित स्थानीय लोगों द्वारा दर्शन पूजन के साथ ही मुंडन संस्कार व वैवाहिक कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।
चुनार बस स्टैंड से लगभग तीन किलोमीटर की दूरी पर चुनार- राजगढ़ मार्ग पर मां दुर्गा का यह मंदिर विराजमान है। मां दुर्गा के उदगम व मंदिर के महत्व के बारे में महंत शिवानंद ने बताया कि युगों पूर्व इसी पहाड़ी वादी में कवलपुरी गोस्वामी नामक एक साधक मां दुर्गा के नाम का तप कर रहे थे जिनकी श्रद्धा भक्ति से प्रसन्न होकर एक दिन रात में मां ने उन्हें स्वप्न दिया कि मैं इसी विंध्य पर्वत की पहाड़ी श्रृंखला में विराजमान हूं। मुझे यहां से निकालकर पास ही कहीं मंदिर की स्थापना करो। इससे जन कल्याण होगा। पहले यह इलाका राजा विजयपुर के हाथों में था इसलिए सुबह होते ही कवलपुरी गोस्वामी ने राजा विजयपुर व क्षेत्र के लोगों से मां दुर्गा के स्वप्न में आने व मंदिर स्थापित किए जाने के बारे में बताया। लेकिन राजा विजयपुर को व लोगों को उनकी बात का यकीन नहीं हुआ। राजा विजयपुर ने कवलपुरी गोस्वामी से कहा कि यदि सच में मां तुम्हारे स्वप्न में आई और मंदिर निर्माण कराए जाने की बात कही है तो तुम्हें कोई ऐसा प्रमाण देना होगा कि तुम्हारी बात सही साबित हो सके। राजा विजयपुर व लोगों की बात पर कवलपुरी गोस्वामी ने एक मिट्टी का हाथी बनाया और उस हाथी को मां दुर्गा की आराधना करते हुए चलायमान कर अपने भक्ति का प्रमाण दिया। इसके बाद राजा विजयपुर व क्षेत्र के लोगों ने मिलकर भव्य मंदिर का निर्माण कर मां की मूर्ति स्थापित कर पूजन अर्चन शुरू किया तभी से क्षेत्र के लोगों की मंदिर से अटूट आस्था जुड़ गई।