जिगना (मिर्जापुर)। स्वामी अडगडानंदजी महाराज ने शुक्रवार को भक्तों को उपदेश देते हुए कहा कि गीता ही सबका मूल है। ज्ञान, पूजा, कर्म आदि गुरु के द्वारा ही मिलता है। जन्म-मृत्यु के भय से छुटकारा देनेवाला गीता ही मात्र एक शास्त्र है।
विजयपुर स्थित परमहंस आश्रम में स्वामी विमलानंद महाराज जी की 37वीं पुण्यतिथि पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। करीब एक लाख भक्तों ने प्रसाद ग्रहण करने के उपरांत स्वामी अडगडानंदजी महाराज के प्रवचन का रसपान किया। उन्होंने कहा भगवान के नाम का स्मरण करने से स्वरूप हृदय में प्रकट होता है। महाराज ने कहा कि मूर्ति तो कलाकार बनाते हैं। ज्ञान मार्ग से भगवान को पाया जा सकता है। यदि सभी लोग गीता का अध्ययन कर लें तो भारत का दु:ख दूर हो जाएगा। महाराज ने कहा कि गीता में जाति पाति आदि का भेद नहीं है, सबको पूजा व भजन करने का अधिकार है। भगवान को देखने के लिए दृष्टि चाहिए। गीता पापियों के उद्धार का साधन है। महाराज ने उपदेश दिया कि अनन्यभाव से भगवान का स्मरण करें। गुरु के द्वारा ही मनुष्य का अंधापन दूर होता है और मुक्ति की ओर जाता है। इस मौके पर नारद बाबा, भगवती सिंह, गिरधारी पाल, गजेंद्र सिंह, पप्पू दुबे, धनेश्वर सेठ, पन्ना लाल, पटेलशेषधर पांडेय, राजन तिवारी, गुड्डू चौबे आदि मौजूद रहे।