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आचार्य रामचंद्र शुक्ल की मनाई गई जयंती

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मिर्जापुर। आचार्य रामचंद्र शुक्ल स्मारक सेवा संस्थान के तत्वावधान में गुरूवार को आचार्य रामचंद्र शक्ल की 133 वीं जयंती मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारभ नगर विधायक रत्नाकर मिश्रा ने दीप प्रज्ज्वलित व रामचंद्र शुक्ल के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। उन्होंने कहा कि जब तक हिंदी होगी आचार्य रामचंद्र अमर रहेेंगे। कहा कि सौभाग्य की बात है कि उनके कर्म भूमि पर आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
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विशिष्ट अतिथि शहर कोतवाल रमेश यादव ने कहा कि बड़े हर्ष की बात है कि ऐसे मनीषी के कर्मभूमि पर आने का अवसर प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के दौरान अजिता श्रीवास्तव ने अपनी हिंदी कविता नमामि गंगे विश्व में बहती हर हर गंगे शिव के जटा से निकली नमामि गंगे प्रस्तुत किया। पं. नारायण उपाध्याय ने कहा कि आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने मित्रता नामक पाठ लिखा था, जिसमें उन्होंने मित्र को औषधि बताते हुए एक वैद्य से तुलना किया था। साहित्यकार वृजदेव पांडेय ने उनके विश्व प्रसिद्घ कार्यों की प्रसंशा की। सुरेंद्र दूबे व सुरेश त्रिपाठी ने उनके जीवनी क बारे में बताते हुए कहा कि वह किसी के मोहताज नही थे, ऐसे मनीषी की जयंती मना कर हम धन्य हो गए। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए त्रिवेणी प्रसाद शुक्ल ने कहा कि आलोचक निबंध के जन्मदाता आचार्य रामचंद्र शुक्ल रहे। संचालन इंद्रजीत शुक्ला व समापन धन्यवाद राकेश चंद्र शुक्ला ने किया। इस अवसर पर इम्तियाज अहमद, इरफान कुरैशी, लालव्रत सिंह, हौसला प्रसाद मिश्र, विमल शंकर दूबे, शोभनाथ सिंह, अजय कुमार दूबे, विजय कुमार दूबे, अमरनाथ सिंह, अजित कुमार यादव, शिवा दूबे आदि उपस्थित रहे।
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