मिर्जापुर। जिले के 18 थानों में खड़े 1500 वाहन कबाड़ में तब्दील होते जा रहे हैं। नीलामी नहीं होने के कारण परिसर में दबाव बढ़ता जा रहा है। वहीं, सड़कों के बाहर ऐसे वाहन खड़े होने के कारण जाम भी लगता है। कई ऐसे वाहनों के पार्ट्स तक गायब हो गए हैं। हाईकोर्ट ने छह महीने में जब्त वाहनों के निस्तारण की नीति बनाने का आदेश दिया था लेकिन उस पर अमल नहीं किया जा रहा।
सीज करने के बाद थानों में दो तरह से वाहन खड़े रहते है। एक माल मुकदमाती और दूसरे लावारिस वाहन रहते हैं। माल मुकदमाती वाहन में गाजा, पशु तस्करी व अन्य आपराधिक गतिविधियों में पकड़े जाने पर सीज किया जाता है। ऐसे वाहन न्यायालय में चल रहे मुकदमें के समाप्त होने के बाद जो आदेश आता है। उस आधार पर नीलाम किया जाता है। लावारिस वाहन में संबंधित मालिक को नोटिस दिया जाता है। नोटिस के बाद भी मालिकाना हक साबित करने कोई नहीं आता है। तो उसे नीलामी प्रक्रिया में शामिल किया जाता है। जिले में 18 थाने है। हर थाने पर 50 से लेकर 200 तक वहन खड़े है। शहर कोतवाली में 100 के करीब वाहन है। लालगंज थाना में 200, ड्रमंडगंज मं 35, राजगढ़ में 137, जिगना में 25, मड़िहान में छोटे-बड़े वाहन मिलाकर 150, पड़री थाना में 23 वाहन है। 13 आटो नीलामी प्रक्रिया में है। हलिया थाना में 96, चुनार थाना में 10 बाइक और 35 बड़े वाहन है। 18 थाना और यातायात विभाग मिलाकर 1500 से अधिक वाहन खड़े है। इसमें 300 के करीब वाहन नीलाम होने लायक है। थानों में पड़े वाहन नीलामी न होने से खराब हो रहे है। हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि जब्त वाहन अपराधी नहीं, राष्ट्रीय विकास के पहिए हैं। हाईकोर्ट ने समन्वय समिति गठित कर छह महीने में जब्त वाहनों के निस्तारण की नीति बनाने का सरकार को आदेश दिया था। इसके बाद भी जिले के थानों में खड़े वाहनों की नीलामी नहीं कराई जा रही है। ये वाहन कबाड़ होते जा रहे हैं। साथ ही थाना परिसर में जगह न होने के कारण सड़कों पर खड़े कर दिए गए हैं। इससे जाम की समस्या बढ़ गई है।
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थाने के बाहर खड़े वाहनों से हादसे का खतरा
जिगना थाने के अंदर वाहनों को रखने का जगह नहीं है। थाना सड़क किनारे स्थित है। ऐसे में बड़ी संख्या में जब्त किए गए वाहन थाने के बाहर खड़े किए गए हैं। इसमें बड़े वाहन भी शामिल हैं। ऐसे में जाम की समस्या के साथ हादसे का खतरा भी बना रहता है।
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वाहनों को रखने के लिए चल रही यार्ड बनाने की प्रक्रिया
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सोमेन बर्मा ने बताया कि थानों में खड़े वाहनों की नीलामी के लिए आरटीओ से उनकी कीमत तय कनाकर न्यायिक आदेश लिया जाता है। इसके बाद डीएम के निर्देशन में कमेटी बनती है, जो मजिस्ट्रेट की निगरानी में नीलामी कराती है। थानों में खड़ेे वाहनों के लिए यार्ड बनाने की प्रक्रिया चल रही है। भूमि का चयन हो गया है। यार्ड बनाकर सभी थानों के वाहन सुरक्षा में रखे जाएंगे।