जिगना। छानबे क्षेत्र क अधिकांश गांवों में सिंचाई की व्यवस्था नहीं और खेती इंद्र भगवान के भरोसे ही हो रही है। प्रकृति पर आधारित खेती के चलते अच्छी उर्वरा शक्ति वाले खेतों से किसान एक फसल ही ले पाते हैं।
क्षेत्र के अकोढी, बिरोही, देवरी, महडौरा, अरगीसरपत्ती, महुआरी, भटेवरा, रामपुर, बलापुर, कौडियरा, त्रिलोक पुर डेरवा, विजयपुर, दादर, बैशपुर, कोलाही, बजहा, चतुरिया, कामापुर, बौडई, बघेडाखुर्द, बघेडाकला, बरबटा, पटेहरा कुशहा, चितौली सहित कई गांवों में सिंचाई हेतु नहर अथवा नलकूप की व्यवस्था न होने के कारण किसानों को प्रकृति के भरोसे ही खेती करनी पड़ती है ।विकास के इस दौर में भी किसानों की मुख्य समस्या सिंचाई पर ध्यान नही दिया जा रहा है जिससे किसानों में असंतोष है ।यही नही छानबे हजार बीघे का एक मुस्त प्लाट जो छनवर के नाम से प्रसिद्ध है असिंचित पड़ा है ।किसानों की मांग पर आश्वासन तो जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों द्वारा जरूर मिलता है लेकिन मामला कागज अथवा जबान तक ही सीमित रह जाता है और किसानों को क्षति का सामना करना पड़ता है ।राजीव कुमार सिंह, पहपट सिंह, सूर्यबली सिंह , इंद्रबली सिंह, रामनाथ, सूर्यमणि यादव, मनोज कुमार, विनोद यादव, विजय पांडेय, संग्राम बिंद, राधेश्याम,कमलेश मिश्र सहित अन्य किसानों का कहना है कि यदि सिंचाई की व्यवस्था हो जाय तो किसानों की आय दोगुनी हो सकती है ।