मिर्जापुर। नहरों की सफाई में गोलमाल किया गया है। सिंचाई विभाग ने जेसीबी चलाकर खानापूरी कर ली, जिसके चलते टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। धान की फसल को एक और सिंचाई की दरकार है लेकिन नहरों में धूल उड़ रही है। पानी नहीं मिलने पर किसानों ने जिले भर में धरना-प्रदर्शन किया। सफाई की पूर्व सूचना देने के आदेश की अवहेलना करने पर जिलाधिकारी ने भुगतान रोक दिया है और जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने के लिए सर्वे भी शुरू कर दिया गया है।
जिलाधिकारी बिमल कुमार दूबे ने बताया कि सिंचाई विभाग को नहरों की सफाई की पूर्व सूचना देने को कहा गया था। पर उन्होेंने बिना सूचना के ही मनमाने तरीके से सफाई कर डाली। ऐसे में सफाई का भुगतान रोक दिया गया है और मामले की जांच कराई जा रही है। पानी की उपलब्धता के बारे में किसानों को सूचना दी गई थी और उनसे कहा गया है कि अफसरों के साथ पेट्रोलिंग कर खुद पानी की स्थिति देख लें। इसके अलावा लेखपाल, कृषि विभाग और किसानों की कमेटी बनाई गई है, जो सूखे की स्थिति का आकलन कर रही है। उसकी रिपोर्ट के आधार पर जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने के लिए शासन को लिखा जाएगा।
जिगना छानबे क्षेत्र में नहरों का जाल है लेकिन फसलें सूख रही हैं। नहरों में घास उगी है या धूल उड़ रही है। हरगढ़ में लिफ्ट कैनाल प्रथम बंद है तथा द्वितीय पंप लिफ्ट कैनाल का पानी हेड से एक किमी तक ही सीमित रह जाता है। नरायनघाट पंप कैनाल का पानी भी एक किलोमीटर और अर्जुनपुर लिफ्ट कैनाल का पानी डेढ किमी तक ही सीमित रह जाता है। उमापुर लिफ्ट कैनाल के मांडा राजबहा व बेलन नहर की मांडा राजबहा में पानी नदारद है। दोनों नहरों का संचालन इलाहाबाद से होता है। अर्जुनपुर लिफ्ट कैनाल की सफाई नदिनी गांव में जेसीबी से कराई गई और ठीक से काम नही हुआ। किसान अमरनाथ तिवारी नागेंद्र सिंह, हरिशंकर सिंह ,जय सिंह, रतनलाल दुबे ,लालमणि, संतोष तिवारी रमाशंकर साहब शुक्ला प्रेम शंकर मिश्र संतोष धर दुबे सुरेश दुबे क्षत्रभान सिंह राकेश मिश्र ने जिलाधिकारी कार्रवाई की मांग की है । मुख्य सिरसी नहर जुलाई में पथरौर के पास दो स्थानों पर टूट गई थी । सिंचाई विभाग के अधिकारी कैफ सिद्दीकी का कहना है कि बारिश की वजह से नहर के बैंक टूटे थे लेकिन हकीकत यह है कि नहर ही जर्जर हो गई है। अहरौरा जलाशय से निकली माइनर बेलहर राजवाहा, बेलहर माइनर,मुडहुडा माइन, शेरवां, जाफरखानी, जफराबाद माइनरों सफाई पर लाखों रुपये खर्च किए गए लेकिन पानी टेल तक नहीं पहुंचा।